शर्मनाक : किसान को आतंकवादी बताती ये तस्वीर आपके मन को झकझोर देगी !

शर्मनाक : किसान को आतंकवादी बताती ये तस्वीर मन को झकझोर देगी !  देश में शायद ही इससे बुरा दिन कोई हो। सरकार ने तो किसानों से मुँह मोड़ ही लिया है मगर अब देश की जनता भी किसानों से बुरा बर्ताव करने लगी है।

क्या किसान इतना बुरा है कि अब उसकी तुलना आतंकी से की जाने लगी है। आख़िर किसान ने ऐसा किया क्या जो लोगों को वो आतंकी लगने लगा और उनकी नज़रों में खटकने लगा। लोगों के दिलों में किसानों के लिए इतनी नफ़रत आख़िर क्यों और कहां से आई।

ऐसे कई सवाल हमारे ज़हन में भी आए जब हमने ये तस्वीर देखी। ये तस्वीर आपका दिल झकझोर कर रख देगी। दरअसल मध्यप्रदेश के ज़िला नीमच, नागदा से एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें एक मेडिकल स्टोर में सामने बड़ा बोर्ड लगा है जिसमें लिखा है कि ‘किसान आतंकवादी है इसलिए मेरे मेडिकल स्टोर पर ना आए।’ इस लाइन के नीचे भानू धनगर नाम भी लिखा हुआ है। हालांकि किसानो से प्यार और उनका आदर करने वाली हमारे देश की जागरूक युवा पीढ़ी ने इस मेडिकल स्टोर चलाने वाले की जमकर धुनाई की और इससे कारण पूछा कि उसने ऐसा क्यों लिखा लेकिन इस व्यक्ति के पास इसका कोई जवाब नहीं था। खैर थोड़े बहुत थप्पड़ खाकर शायद इसकी अकल ठिकाने आ गई हो।

मगर अब सोचने वाली बात आखिर ये है कि एक किसान इस मेडिकल स्टोर चलाने वाले को आतंकी क्यों नज़र आया। वो किसान जो आज देश में सबसे ज़्यादा लाचार है,सबसे ज़्यादा मजबूर है, जो भुखमरी और कर्ज के बोझ तले दबा है, जिसने हमसे कभी कुछ नहीं लिया बस अपना अन्न खिला कर हमे बड़ा किया और आज भी उसी अन्नदाता के हम कर्जदार हो वो भला कैसे आतंकी हो सकता है! अफ़सोस होता है देश के नौजवानों की सोच पर और सिर्फ़ अफ़सोस ही नहीं बल्कि खून खौल उठता है ऐसा कोई पोस्टर देखकर कि हमारे देश का नौजवान ऐसे बदलेगा हमारा देश।

वाकई में अगर ऐसी है हमारे देश की नई पीढ़ी तो उसे इलाज की आवश्यकता है। माता पिता की की कमाई और इंटरनेट के स्नोफिलिया ने इन्हे इतना बर्बाद कर दिया है कि इन्हें किसान आतंकवादी नज़र आने लगा है।

इनकी नज़रों में अब किसान के मायने सिर्फ दिहाड़ी मजदूर और इनके लिए आनाज पैदा करने वाला मौसमी नौकर है शायद। कोई ज़रा इनसे ये पूछे कि सरसों के खेतों में इन रंगरूटों की सेल्फी और वीआईपी होटल में बर्बाद करने वाला अन्न क्या इनके पुरखे उगाते है ? इसमें कहीं ना कहीं सरकार का ही दोष है। सरकारों की उपेक्षा के बाद समाज जिस तरह किसानों को हेय दृष्टि से देखने लगा है वो दिन दूर नहीं जब किसान विहीन ये देश किसान आत्महत्या में सिरमौर बनकर आकाल के गर्त में होगा। फिर ये सभी घटिया मानसिकता के लोग इसी किसान आतंकवादी को खोजते फिरेंगे और सरकार को देशद्रोही कहेंगे। ध्यान रहे ये मानसिक वायरस राजनीति के नाबदान से ही निकला है।

 

 

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