विकासशील भारत में विकास की राह खोजता किसान

विकासशील भारत

विकासशील भारत में विकास की राह खोजता किसान-कहते हैं, किसी देश की आर्थिक तरक्की से लेकर देश की आन्तरिक तरक्की में सबसे बड़ा योगदान किसान का होता है। लेकिन न जाने क्यों, किसान बार बार अपने वजूद को खोजने में गोता खाता रहा है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भी किसानों की स्थित अत्यन्त सोचनिय व निंदनिय है।

सोचनिय इसलिए कि भारतीय किसान वर्षों से मानसून प्रिय रहा है। जो समय-समय पर आने वाले मानसून के साथ ही अपनी फसलों को खेतों  में लगाता है। लेकिन विकास व प्रगति के पथ पर रोड़ा बन रहा पर्यावरण, जिसको कि हमने अपने निजी स्वार्थ के चलते दिनों दिन नष्ट कर दिया है।

आज वही हमारे सामने किसानों की दयनिय स्थित बनकर हमारे सामने आकर खड़ा हो गया है। जिससे निपटना और अपने व्यक्तित्व को बचाना किसानों के लिए काल बन गया है।

दिनों दिन बढते ग्लोबल वार्मिंग व समय के बदलते घटनाक्रम में आज किसान न तो अपनी फसलों को खेतों में सजों पा रहा है। और न ही खेती से अपनी आर्थिक तंगी में सुधार ला पा जा रहा है।

और निंदनिय इसलिए कि किसानों की समस्या व किसानों की आर्थिक तरक्की की बात कर किसानों से वोट लेकर सत्ता पर बैढने वाले नेता। जिन्हें न तो देश की फिकर है और न ही किसानों की। 1947 में आजाद हुआ भारत पिछले न जाने कितने दशकों से कृषि प्रधान देश रहा है। लेकिन ये हमारे देश के नेताओं की ही देन है। कि भारत जैसे समृध्द देश में भी किसान आत्महत्या करने पर विवश है।

 

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