सामने आई गुफा से निकले बच्चों की कहानियां, जाने कोच ने कैसे बचाई 13 जिंदगियां

लुआंग गुफा

थाइलैंड की थाम लुआंग गुफा में 17 दिनों से फंसी 12 जिंदगियों को बचाने के लिए कोच इकापोल चांटावांग (25) ने कुछ ऐसा किया कि मिशाल बन गया. गुफा से बाहर आये बच्चों ने शुरुआती 9 दिनों की कहानी बताई, कि कैसे इकापोल ने बच्चो की जिंदगी बचाने के लिए अपना खाना भी उन्हें दे दिया. गुफा से 16 दिन बाद निकाले गये 4 बच्चों ने जब ये घटना अपने परिवारजनों को बताई तो लोगों ने इकापोल का शुक्रिया किया. अभी तक गुफा से 8 बच्चों को निकाला जा चुका है. लेकिन अभी गुफा में कोच इकापोल के साथ 4 बच्चे फंसे हुए हैं.

गुफा से निकले बच्चों ने बताया कि, “गुफा में फंस जाने के बाद हमारे पास खाने पीने का सामान काफी सीमित था. जिसके बाद कोच इकापोल ने अपने हिस्से का खाना भी हम सबमें बांट दिया. साथ ही इकापोल हम सबको ऊर्जा बचाने के तरीके बताते रहे. गुफा में कैद रहने के समय वो हमारी हिम्मत बढ़ाते रहे. साथ ही खराब स्थिति में खुद को उस परिस्थित के  मुताबिक बनाने के तरीके बताते रहे. ” बचाव दल के ने भी बताया है कि गुफा के अंदर बच्चों के पास पहुंचने पर कोच इकापोल सबसे ज्यादा कमजोर दिखाई दे रहे थे.

जिसके बाद इकापोल ने गुफा के अंदर से ही लोगों के परिवार वालों को चिट्ठी लिखकर मांफी भी मांगी है.

लेकिन लोग जहां इकापोल के साहस व हिम्मत की दाद दे रहे हैं. वहीं गुफा से निकले पोरनचाई की मां खमलुआंग ने कहा कि, “इकापोल हमारे बच्चों के लिए भगवान बन गया. अगर वो गुफा में बच्चों के साथ नही होता तो पता नहीं अब तक क्या हो जाता. जब वो बाहर आयेगा तो मैं उसका धन्यवाद दूंगी. इस मुश्किल घड़ी में बच्चों कि हिम्मत बनाये रखने के लिए उसका आभार प्रकट करूंगी. मेरे प्यारे इकापोल, मुझे तुमसे इस घटना को लेकर कोई भी शिकायत नही है. ”

वहीं, अब्दुल सैम-ऑन के घरवालों ने कहा है कि, इकापोल तुम्हें किसी भी बात की फिकर करने की जरुरत नहीं है. तुम किसी भी तरह से दोषी नहीं हो. न ही तुम अपने आप को दोष दो. हम सब तुम्हारे बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं. ”

फुटबॉल कोच इकापोल के दोस्तों ने बताया की महज 10 साल की उम्र में इकापोल अनाथ हो गया था. जिसके बाद वो साधु बन गया था. साथ  ही साधु की शिक्षा भी ली थी. परिवार में बची बीमार दादी की सेवा के लिए इकापोल ने साधु बनने का मन त्याग दिया. जिसके बाद ही इकापोल ने मू पा फुटबॉल टीम को फुटबॉल शिक्षण के लिए जॉइन किया और बच्चों को प्रशिक्षित कर रहा था.

 

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