सॉरी राहुल गांधी ! कोका-कोला के मालिक शिकंजी नहीं बेचते थे, ना ही मैक्डोनाल्ड के मालिक ढाबा चलाते थे

राहुल गांधी ! कोक के मालिक शिकंजी नहीं बेचते थे

राहुल गांधी ! कोक के मालिक शिकंजी नहीं बेचते थे, ना ही मैक्डोनाल्ड के मालिक ढाबा चलाते थे

हमारे देश में कई ऐसे नेता हैं जो विवादस्पद बयान के लिए जाने जाते हैं मगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तो अपने हास्यास्पद बयानों के लिए ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहते हैं। जी हां, राहुल गांधी का एक वायरल वीडियो लोगों को हंसा हंसा कर लोट पोट कर ही पाता है कि उनका दूसरा वीडियो फिर से सोशल मीडिया के बाज़ार में आ जाता है। इस बार तो राहुल गांधी ने कोकाकोला और मैक्डोनाल्ड के बारे में कुछ ऐसा कह दिया है कि सिर्फ देश ही नहीं विदेश से ट्वीट कर उन्हें खरी खोटी सुना रहे हैं। दरअसल दिल्ली में ओबीसी सम्मेलन में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ओबीसी वर्ग के उत्थान को लेकर कोका-कोला कंपनी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘कोका-कोला कंपनी को शुरू करने वाला एक शिकंजी बेचने वाला व्यक्ति था। पानी में शक्कर मिलाता था। उसके काम का आदर हुआ। उसे पैसा मिला और कोका-कोला कंपनी बनी। राहुल ने आगे कहा, ‘कोका-कोला की तरह मैकडोनाल्ड कंपनी का मालिक भी कभी ढाबा चलाता था और आज दुनियाभर में उसका नाम है। भारत में आज एक भी ऐसा ढाबा वाला नहीं है, जो कोका-कोला जैसी बड़ी कंपनी खड़ा कर सकता है। अब हम आपको यहां कोकाकोला और मैक्डोनाल्ड से जुड़ी वो जानकारी दिखाने जा रहे हैं जो विकिपीडिया पर मौजूद है।

आइए, हम आपको बताते हैं कि दुनिया की इन दोनों मशहूर कंपनियों की शुरुआत कैसे हुई.

कोका-कोला शुरुआत की कहानी

कोका-कोला दुनिया में सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले ब्रैंड में से एक है जिसे 200 से ज्यादा देशों में बेचा जाता है। कोका-कोला की शुरुआत 1886 में अमेरिका के अटलांटा में एक फार्मासिस्ट डॉ जॉन एस पेम्बरटन ने की थी।

पेम्बरटन ने अमेरिकी सिविल वार के बाद दर्द से राहत के लिए मॉर्फिन अफीम का सहारा लेना शुरू कर दिया, लेकिन एक फार्मासिस्ट होने की वजह से उन्हें मालूम था कि मार्फिन लंबे समय तक लेना खतरनाक हो सकता है। इसलिए उन्होंने ऐसी ड्रिंक बनाने के बारे में सोचा जिसमें अफीम नहीं हो बल्कि कोका का इस्तेमाल किया जाए। जिसके बाद पेम्बरटन ने कोकिन, कोला नट और एक और पौधे को मिलाकर एक ड्रिंक बनाई जिसे पहले पेम्बरटन की फ्रेंच वाइन कोला का नाम दिया गया। मगर बाद में पेम्बरटन इस सिरप को जग में लेकर इसमें सोडा साथ में मिलाकर बेचने लगे। लोगों को ये ड्रिंक काफी पसंद आई। जिसके बाद पेम्बरटन के एकांउटेंट फैंक्र रोबिन्सन ने कोला-कोला लिखने का डिजाइन बनाया जो आगे चलकर कोकाकोला के नाम से मशहूर हुआ। मतलब साफ़ है कि कोकाकोला का शिकंजी नीबू से कोई मतलब है ही नहीं।

मैक्डोनाल्डः शुरुआत की कहानी

अब हम बात करते हैं मैक्डोनाल्ड के शुरू होने की कहानी की जो बड़ी दिलचस्प है। इसकी शुरुआत 1940 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में दो भाईयों ने की थी। इनके नाम डिक और मैक मैक्डोनाल्ड थे। इन दोनों भाइयों ने मैक्डोनाल्ड नाम से हैमबर्गर बेचने वाला रेस्टोरेंट शुरू किया। सस्ते हैमबर्गर का आइडिया कैलिफोर्निया में इतना हिट हुआ कि दोनों भाइयों ने इसकी फ्रेंचाइजी देनी शुरू कर दी। अमेरिका से बाहर मैक्डोनाल्ड का पहला रेस्टोरेंट कनाडा में शुरू हुआ था।

आज दुनियाभर के 100 देशों में मैक्डोनाल्ड ग्रुप के 36,000 रेस्टोरेंट हैं। तो ये थी कोकाकोला और मैक्डोनाल्ड की असली कहानी जिसका ढावा और शिकंजी से कोई लेना देना नहीं है। आप खुद भी गूगल कर के इससे जुड़ी और भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। खैर अगर जो राहुल गांधी ने कहा वो सच भी होता तो भी हम यही कहते कि हमारे देश में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जो शून्य से शिखर तक पहुंचे हैं। हम उनसे भी आगे बढ़ने के गुर सीख सकते हैं। आपका इस बारे में क्या कहना है और आपको राहुल गांधी का ये बयान सुनकर क्या लगा कमेंट कर के हमें जरूर बताएं।

 

 

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