राजधानी दिल्ली की कमान किसको? LG को या केजरीवाल को

राजधानी दिल्ली

पिछले कुछ दिनों से राजधानी दिल्ली सरकार और LG के बीच शक्ति बंटवारे को लेकर चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला दे दिया. सुप्रीम कोर्ट ने साथ में ये भी कहा की दिल्ली की सरकार ही दिल्ली की जनता के प्रति उत्तरदायी है, और शक्तियों पर  भी दिल्ली सरकार की ही असल पावर है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों के मन में अलग तरह का मतभेद बन गया है.

1-दिल्ली सरकार और एलजी बढ़ायें मेल-जोल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों पक्षों को मेल-जोल के साथ सरकार चलाने के लिए कहा है. लेकिन सवाल ये उठता है कि इतने दिनों से चल रही तल्खी में क्या एलजी कैबिनेट की सलाह मानेगें. जाहिर है, दिल्ली की सरकार का रोड़ा बनी एमसीडी अभी भी सरकार की मुसीबतें बढ़ा सकती है. इसलिए दिल्ली सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन करने की बात कर रही है.

2-क्या कहता है सविंधान 

संविधान के आर्टिकल 239AA (4) के अनुसार दिल्ली सरकार और LG के बीच के मतभेदों को राष्ट्रपति के पास ले जाया जाएगा. लेकिन दिल्ली सरकार, LG और सरकार के बीच के मतभेद को उजागर करने को कहती आई है. साथ ही दिल्ली सरकार किसी भी मामले को राष्ट्रपति के पास भेजने से कामकाज में बाधा आने की बात कह रही है. इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने जनता द्वारा चुनी सरकार को सर्वोपरि बताते हुए कहा है कि मामले को राष्ट्रपति तक ना भेजा जाए.

3-अभी किन मुद्दों पर फैसला आना बाकी है?

गृह मंत्रालय के द्वारा जारी नोटीफिकेशन में LG के अधिकार में सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड से जुड़े मामले रखे गये थे. जिसके चलते राजधानी दिल्ली की सरकार के हाथों से क्लास-1 अफसरों के पोस्टिंग-ट्रांसफर उनके हाथों से छिन गये थे. दिल्ली सरकार को बस अधिकारियों की जांच पड़ताल तक ही सीमित कर दिया गया था. जिसकी खारिज करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट की रेग्यलुर बेंच सुनवाई करेगी और फैसला बाद में आएगा.

4-LG से अप्रूवल की जरुरत नहीं-सिसोदिया

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद, राजधानी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि, अब फाइलों को LG के अप्रूवल की कोई जरुरत नहीं है. SC के फैसले से साफ हो गया है कि अब हम पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड को छोड़कर हर मामले पर खुद फैसला ले सकते हैं.

उन्होनें साथ में ये भी कहा की सारी फाइलें LG के पास जाने लगी थी. जिसके चलते हमारे कामों में अड़ंगा लगाया जा रहा था.

5-किसके हित में फैसला केंद्र के या AAP के

केंद्रीय गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करने की बात कही. लेकिन सूत्रों के मुताबिक SC ने सविंधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला सुनाया है. केंद्र ने कहा कि, दिल्ली सरकार चाहती है की एलजी की भूमिका राज्यपालों की जैसी सीमित कर दी जाये. मगर SC ने ऐसा नही किया है. साथ ही केंद्र की नजर में दिल्ली सरकार की अराजकता पर सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार के खिलाफ है.

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