मुसहर जाति के लोग बरसों से जी रहे है लाचारी और बेबसी की जिंदगी

मुसहर जाति

आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद आज भी समाज के कई वर्ग मुख्य धारा से बहुत दूर है। हालांकि, संविधान ने समाज के इन दबे कुचले वर्गो को मुख्य धारा मे लाने के लिए कई सहुलियतें भी दी है। तो वहीं केन्द्र और राज्य सरकारें भी कई प्रयास कर रही है कि, ये दबा कुचला वर्ग समान्य जीवनयापन कर सके। लेकिन सरकार का ये प्रयास भी विफल सा लगता है।

कुछ ऐसी ही दशा है, कुशीनगर के तराई क्षेत्रों मे फैले मुसहर प्रजाति की। जो आज भी सरकार की योजनाओं का ठीक से लाभ नही उठा पा रहें है, और बंधुआ मजदूरों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। मुसहर एक आदिवासी जनजाति है। जो अलग-अलग जगहों से आकर जनपद कुशीनगर में बसे है।

बता दें, कि इनकी संख्या करीब 18-19 हजार है। जो लगभग 100 छोटी-छोटी बस्तियों मे रह रहे है। सालो पहले जब गरीबी और भुखमरी ज्यादा थी, उस समय इस जनजाति के लोग खेतों में अनाज के साथ साथ चुहा मारकर खाया करते थे। जिसकी वजह से उनका स्थानीय नाम मुसहर पड़ गया।

हालांकि, अब इस जाति के लोगों ने चूहा खाना छोड़ दिया है। लेकिन आज भी उनका नाम मुसहर ही है। आजादी के 70 साल बाद भी ये जनजाती गरीबी और बेबसी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर है। ज्यादातर मुसहर बस्तियों में जाने के लिए न तो कोई सड़क है, न ही घर और न ही साफ-सफाई।

बता दें, कि ये समुदाय कुपोषण और बीमारी का इलाज करा पाने से भी वंचित है। ये मुसहर समुदाय अपनी रोजी रोटी के लिए जमींदारों के खेतो में काम करते है, और अपनी जीविका चलाते है। लेकिन तकनीकी के बढ़ते प्रभाव की वजह से वो आज बेरोजगारी के कागार पर है, क्योकि अब कृषि सम्बन्धी ज्यादातर काम ट्रैक्टर से हो जाते है

जहां एक ओर कुशीनगर में इस समय आधुनिकीकरण की तमाम सुविधाएं नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ कुशीनगर में बसे मुसहर जाति के लोग बीमारी और गरीबी के चलते अपनी जान गवां रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नें भी मुसहर जाति के लोगों के लिए आंदोलन किया था। लेकिन बावजूद इसके मुसहर जाति के लोग तमाम सुविधाओं से वंचित रह रहे है।

हालांकि केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार से मुसहरों को खास उम्मीद है, और सरकार भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही है। सरकार के रुख को साफ़ करते हुए कुशीनगर के जिलाधिकारी ने बताया कि, जिले के मुसहर टोलो पर हम विशेष ध्यान दे रहे है।

मुसहर बिरादरी के लोग लाचारी और जागरूकता की कमी के कारण सर्वाधिक संख्या में टीबी जैसी गंभीर बीमारी के चपेट में है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग जनपद में अब तक कुल 27750 क्षय रोगियों का दावा कर रहा है। जबकि गैर सरकारी संगठनों के हिसाब से जिले में टीबी से ग्रसित रोगियों की संख्या 30 हजार के आंकड़े को पार करने जा रही है। जिनका स्वास्थ्य विभाग के पास कोई आंकड़ा नही है।

 

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