मासूम के ऊपर यह कैसा अत्याचार, क्या गलती थी 6 साल की खुशबू की जो उसे झेलनी पड़ी यह सजा

खुशबू

गांव में पंचायत होती हैं। पंचायत के होते गांव में पुलिस की जरुरत नही होती। लेकिन खुशबू के राजस्थान के हरिपुरा गांव में सथूर पंचायत की कोई जरुरत नही हैं। हम आपको एक 6साल की बच्ची खुशबू के बारे में बता रहें हैं। राजस्थान के  हरिपुरा सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाली खुशबू भी आम लड़कियों की तरह ही हैं। वो रोज़ की तरह 2 जुलाई को भी स्कूल गई। 2 जुलाई को सरकार की दूध वितरण योजना का आगाज भी था। ग्रामीण भी आए हुए थे। बच्ची प्रार्थना सभा के बाद दूध के लिए लाइन में लगी थी, भीड़ में धक्का लगा तो पास ही जमीन पर बने टिटहरी के घोंसले पर खुशबू का पैर पड़ गया और उससे एक अंडा फूट गया। बात गांव में फैल गई।

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अंडा फूटने पर गांव में हड़कंप मच गया। अंडा फूटने की वजह से गांव में शाम को ही पंचायत बैठी। फैसला हुआ कि बच्ची ने जीवहत्या की है। बच्ची से गलती हुई थी उसने कोई हत्या नही की थी। लेकिन पंचायत के सामने किसी के बोलने की शायद हिम्मत नही थी मासूम खुशबू को जीवहत्या करने के लिए सजा सुनाई गई। सजा के तौर पर उसे जात बाहर करने का फरमान सुना दिया गया। जुर्माना तय हुआ कि शंकेश्वर महादेव मंदिर में बच्ची को नहलाया जाए। एक किलो भूंगड़े, एक किलो नमकीन, अंग्रेजी शराब की बोतल बच्ची का पिता पंचायत को देगे और साथ ही गायों को चारा, मछलियों को आटा, कबूतरों को ज्वार डालेगे।

पंचायत में जो जुर्माना तय हुआ वो खुशबू के पिता हुकमचंद ने सब कर दिया। फिर तीन दिन बाद पंचायत बैठी पर बात इस पर अड़ गई कि हुकमचंद ने एक पंच से कुछ साल पहले उधार लिए डेढ़ हजार रुपए लिए थे वे पहले वो पैसे चुकाएंगे तभी पंचायत बच्ची को जात में शामिल करेंगी। लेकिन वे इतनी जल्दी उनके पैसे कैसे दे देते उन्होंने पंचायत से एक महीने के मोहलत मांगी तो पंचायत ने उन्हें इनकार कर दिया।

मासूम को तो पता भी नही था की उसके साथ क्या किया जा रहा हैं। सथूर पंचायत के हरिपुरा गांव में मासूम खुशबू पर जातीय पंचायत के फरमान पर जुल्म होता रहा। मासूम 10 दिन तक अछूत बनी रही। मां को छूने और घर में प्रवेश तक की इजाजत उसे नहीं थी। खाना-पानी भी उसे अछूत की तरह ऊपर से ही डाला गया। आंगन में खाट पर अपने स्कूल बैग को गोद में लिए बैठी खुशबू को पता ही नहीं था कि उसे किस बात की सजा दी जा रही है।

वह कभी बैग से किताब निकालकर उसके फोटो देखती तो कभी मां के पास जाने के लिए रोने लगती। पिता हुकमचंद के पास हाथ से लिखी पर्ची थी, उसके मुताबिक यह पंचायत के लोगों ने दी है, जिस पर पंच रामदेव, छीतरमल, औंकार, रंगनाथ, चंद्रभान, रमेश, कालू, मोडू, ग्यारसीलाल, मोहन आदि के नाम थे, पर्ची में दारू की बोतल, एक किलो नमकीन, आधा किलो भूंगड़ा लाने की बात भी लिखी हुई थी।

कलेक्टर-एसपी के पास बात पहुंची तो हिंडौली तहसीलदार भावनासिंह, एसएचओ लक्ष्मणसिंह पुलिस जाब्ते के साथ हरिपुरा आए। प्रमुख पंचों को बुलाया गया। थोड़ा समझाया-थोड़ा हड़काया गया। चना-भूंगड़े और नमकीन बांटकर बच्ची को घर में प्रवेश कराया गया। बच्ची अंदर जाते ही मां से लिपट गई। पुलिस और तहसीलदार के समझाने के बाद पंच मान गए। कोई केस दर्ज नहीं किया।

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लेकिन यह कैसी पंचायत और लोग क्यों कर रहें इस पंचायत का पालन। पंचायत के पंचों को मासूम पर जरा सी भी दया नही आई। 10 दिनों तक मां और पिता से 6साल की खुशबू को दूर रखा गया

 

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