भोपाल : ‘पैड’ बनाकर लड़कियों को कर रहीं है जागरूक, जानी जाती है पैडवुमन के नाम से

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान सैनेटरी नैपकिन का लड़कियों के जीवन में सही अर्थ बताने के लिए अब कई कार्यक्रम बनाए जा रहें है. वहीं हम सब भी इस बात से रूबरू हैं कि आज भी पिछड़े कई इलाकों में लड़कियां मासिक धर्म और उनसे जोड़ी समस्याओं पर बात करने से हिचकिचाती है. मासिक धर्म के दौरान लड़कियां कपड़े का इस्तेमाल करती है जो कि बहुत गलत बात है, जो महिलाओं के लिए बीमारियों की जड़ है. जी’ जल्द ही रिलीज़ होने जा रही है

वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में करीब 10 महिलाएं पैड बना रही हैं। सामाजिक रूप से पिछड़े इस जिले की इन ‘पैडवुमेन’ ने जिले को बीमारियों से मुक्त करने का संकल्प लिया है। जानकारी के अनुसार इस ‘पैडवुमेन’ ग्रुप की मुखिया हेमलता को पैड बनाने के लिए गांववालों ने न केवल उन्हें रोका था, बल्कि उन्हें धमकी भी दी थी।

पहले यह सभी महिलाएं खुद के लिए पैड बनाती थी. लेकिन अब वो इन पैड्स को सबके लिए बना रही है साथ ही इन्हें बेच भी रही हैं। पैड्स को बेचकर इन महिलाओं को 900-1000 रुपये की आमदनी हो जाती है। पैड्स बनाने के साथ-साथ और महिलाओं ने पीरियड्स के बारे में दूसरी महिलाओं को जागरुक करने का भी जिम्मा उठाया है। पीरियड्स में कपड़ा इस्तेमाल करना खतरनाक होता है। इसके बारे में महिलाओं ने अब आवाज उठाई है।

 

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