भारत की पहली महिला डिलीवरी एजेंट बन पार्वती ने किया सबको हैरान।

भारत की, पहली, महिला डिलीवरी एजेंट, बनी, पार्वती कुमारी

मात्र 21 वर्ष की आयु में पार्वती कुमारी ने भारत की पहली महिला डिलीवरी एजेंट बन कर केवल लोगो को ही नहीं बल्कि पत्रकारो का भी अपनी ओर बहुत ध्यान आकर्षित किया। लखनऊ शहर की यह लड़की अब भारत में पहली डिलीवरीगर्ल के नाम से जानी जा रही है। पार्वती ने केएफसी की पहली महिला स्कूटर डिलीवरी एजेंट बनकर समाज को आश्चर्यचकित कर दिया है।

पार्वती सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक की शिफ्ट के दौरान एक दिन में चार से दस डिलीवरी करती है। और इतना ही नहीं उनके कुछ ग्राहको द्वारा उनके काम को सराहा भी जा रहा है। पार्वती अपने काम को लेकर बहुत खुश है व उन्होने बताया कि, “कुछ ग्राहक मुझे चाय और स्नैक्स के लिए आमंत्रित करते हैं। वे अधिकतर आश्चर्यचकित होते हैं क्योंकि उन्होने केवल लड़कों को ही अब तक डिलीवरी करते हुए देखा हैं।”

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21 वर्ष की आयु में पार्वती कुमारी भारत की पहली महिला डिलीवरी एजेंट बनी

केएफसी इंडिया ने पार्वती के बाद डिलीवरी नौकरियों के लिए और अधिक महिलाओं की भर्ती करने का फैसला किया है। उनके मुताबिक महिला स्कूटर डिलीवरी को लेकर ग्राहकों से अच्छी प्रतिक्रिया रही है। दरअसल पुरूषो की अपेक्षा महिला सहयोगी ईमानदार, मेहनती और अत्यंत ध्यान केंद्रित होती हैं।

हालांकि अब ऑनलाइन शॉपिंग अमेज़ॅन, ऑनलाइन, डिलीवरी फर्म डीईडी,  डॉमिनो, पिज़्ज़ा हट और सबवे आदि कई कंपनियों ने महिला स्कूटर डिलीवरी की मांग को बढ़ दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला डिलीवरी एजेंट इस उद्योग में उत्कृष्ट प्रतिधारण दर हासिल कर रहे हैं और यह 50% तक बढ़ गया है। यहां तक ​​कि ग्राहक भी महिलाओं की सेवाओं से खुश हैं और उनके प्रयासों की सराहना करते हैं।

लेकिन इसी के साथ महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का कारण है। कंपनियां अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कई पहल कर रही हैं। वे उन्हे आत्मरक्षा वर्ग प्रदान कर रहे हैं।  व यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके ड्यूटी के घंटो मे खिंचाव न हों और महिलाओं को रात की पाली न मिले। और महिला डिलीवरी सहयोगियों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर है, जो दिन के दौरान वे मदद के लिए डायल कर सकती है।

देखा जाए तो परंपरागत रूप से एक प्रमुख पुरुष नौकरी अब महिलाओं में शामिल होने की पेशकश कर रही है। पेशे के इस क्षेत्र में लड़कियों का प्रवेश करना समाज के लिए बहुत बड़ी जीत है। कि अब जल्द ही पेशे के क्षेत्र मे भी लड़कियां लड़को की बराबरी कर सकेंगी।

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