भय्यूजी महाराज : मॉडलिंग से अध्यात्म और फिर आत्महत्या तक का सूना सफ़रनामा

भय्यूजी महाराज : मॉडलिंग से अध्यात्म और फिर आत्महत्या

जाने माने आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज ने मध्य प्रदेश के इंदौर में अपने घर में लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। भय्यूजी महाराज को जबतक अस्पताल ले जाया गया तब तक भय्यूजी महाराज इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। भैय्यूजी महाराज के पास देशभर से उनके अनुयायी अपनी समस्याएं लेकर आते थे कि एक भैय्यूजी महाराज ही हैं जो उनको समाधान दे सकेंगे। अपने दुःख दूर करने के लिए उनके भक्त सिर्फ भैय्यूजी महाराज का ही नाम पुकारा करते थे। मगर कौन जानता था कि वो ख़ुद अंदर ही अंदर इतना घुट रहे हैं। दूसरों की तकलीफें दूर करते करते भैय्यूजी आखिर अपनी परेशानियों से अकेले ही जूझते हुए इस दुनिया से चले गए।

भय्यूजी महाराज अपने पीछे लाखों करोड़ों चाहने वाले छोड़ गए। सिर्फ आम जनता ही नहीं देश की नामी हस्तियां भी उनसे मिलने आती थीं। मर्सेडीज जैसी महंगी गाड़ियों में चलने वाले भय्यू जी रोलेक्स ब्रैंड की घड़ी पहनते थे और आलीशान बिल्डिंग में रहते थे। एक किसान की तरह वह कभी अपने खेतों को जोतते-बोते दिखते थे, तो कभी क्रिकेट के शौकीन नजर आते थे। घुड़सवारी और तलवारबाजी में महारथ के अलावा कविताओं में भी उनकी दिलचस्पी थी। लेकिन फिर भी वो अपने अकेलेपन से पार न पा सके और जिंदगी खत्म कर ली। पुलिस को भैय्यूजी महाराज एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उन्होंने पारिवारिक कलह को मौत की वजह बताया है। भैय्यूजी महाराज की पहली पत्नी का निधन हो गया था जिसके बाद उन्होंने आयुषी से दूसरी शादी की मगर पहली पत्नी की बेटी और दूसरी पत्नी के बीच बनती नहीं थी जिस वजह से ही भैय्यूजी महाराज परेशान रहते थे। संत भय्यू महाराज असली नाम उदयसिंह देखमुख है। उनका जन्म वर्ष 1968 में हुआ था। वो शुजालपुर के किसान परिवार से ताल्लुक रखते है। उनकी मौत की सूचना के बाद देर रात तक श्रद्धांजलि का सिलसिला चलता रहा। उनकी पार्थिव देह को बॉम्बे हॉस्पिटल से उनके निवास स्थान स्कीम नंबर 74 स्थित आवास ‘शिवनेरी’ में लाया गया। यहां से भय्यूजी महाराज के पार्थिव शरीर को सुखलिया स्थित आश्रम ‘सूर्योदय’ में ले जाया गया है।

 

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