बाल श्रम एक अपराध है, फिर भी देश के 42 लाख बच्चे कर रहे है बाल मजदूरी

बाल श्रम

बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत भारत में 16 साल पहले यानिकी साल 2002 में तब हुई थी। जब देश में साल 2001 में बाल मजदूरी के करीब सवा लाख मामले सामने आए थे। हालांकि, कानूनी रूप से बाल श्रम को भारत में साल 1986 में ही अपराध घोषित कर दिया गया था। लेकिन तब भी बाल मजदूरी रुकी नहीं। आज भी देश के कई शहरों, गांवों में छोटे, मासूम बच्चे बाल श्रम का शिकार हो रहे है। गैरकानूनी होने के बावजूद भी पेट पालने के लिए बच्चों को मजबूरन मजदूरी का सहारा लेना पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के एक अनुमान के अनुसार, आज भी विश्व भर में करीब 21 करोंड़ 80 लाख बाल श्रमिक मौजूद है। आप सोच सकते है। कि गैरकानूनी होने के बाद दुनिया में बाल मजदूरों की संख्या इतनी है। तो उस वक्त ये तादाद कितनी रही होगी। जब बाल श्रम पर कोई कार्यवाही तक नहीं थी।

बाल श्रम निषेध दिवस को अंतराष्ट्रीय स्तर पर हर साल 12 जून को मनाया जाता है। बाल मजदूरी गैर-कानूनी है। लेकिन फिर भी भारत के साथ-साथ कई और देशों में आज भी खुलेआम हो रहा है।

हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस को बाल मजदूरी के प्रति विरोध और जगरूकता फैलाने के मकसद से मनाया जाता है। बाल मजदूरी से ना जाने कितने मासूमों का बचपन बर्बाद हो रहा है। हमारे देश में आज भी करीब 42 लाख बच्चे बाल श्रम करने को मजबूर है। हालांकि, ये संख्या अब पहले से कम हो रही है। लेकिन हमारा लक्ष्य बाल मजदूरी कम करना नहीं, बल्कि खत्म करना होना चाहिए। गरीबी, लाचारी और पापी पेट की भूख बच्चों को ये करने पर मजबूर कर देती है।

कई जगहों पर तो खुद बच्चों के माता-पिता ही उन्हें बाल मजदूरी के दलदल में फंसा देते है। जानकारी के मुताबिक देश का हर पांच में से एक भारतीय गरीबी की मार खा रहा है। और देश की 80 फीसदी ग्रामीण आबादी गरीबी का मार झेल रही है। इस गरीबी के चलते माता-पिता अपने जिगर के टुकड़ो से काम करवाने के लिए मजबूर हो जाते है। और दो वक्त की रोटी के लिए ये मासूम होटलों, घरों और कंपनियों में बर्तन धोते दिखाई देते है।

भारत में चाइल्ड लेबर ऐक्ट साल 1986 में बनाया गया था। लेकिन अपराध घोषित होने के बाद भी देश के हर गली मोहल्ले में आप बाल मजदूरी की झलक देख सकते है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में करीब 215 मिलियन ऐसे बच्चे है। जिनकी उम्र 14 साल से कम है। और वो बाल मजदूरी को मजबूर है। लेकिन ये जानकर आपको दुख होगा। कि दुनियाभर की तुलना में बाल मजदूरों की सबसे ज्यादा तादाद भारत में है।

बाल श्रम को खत्म करने के उद्देश्य से देश में कई एनजीओ बाल मजदूरी के खिलाफ अपनी मुहिम चला रहे हैं। और बाल मजदूरी को खत्म करने की कोशिश में कई लोग जुटे हुए है। इनमें से एक नाम कैलाश सत्यार्थी का भी है। कैलाश ने बाल श्रम को जड़ से मिटाने की कोशिश की। ओक जिसके लिए उन्होने बचपन बचाओ आन्दोलन की शुरूआत की। कैलाश अब तक अपने इस आंदोलन के चलते दुनिया भर के करीब 85,000 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी से आजादी दिला चुके है।

कैलाश सत्यार्थी को उनके इस नेक काम के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। कैलाश जैसे कई और लोग दुनियाभर में ऐसी मुहिमों के जरियें बाल श्रम को खत्म करने की कोशिश कर रहे है। लेकिन इन सबके बावजुद भी बाल मजदूरी जड़ से खत्म कर पाना नामुमकिन के जैसा है।

कुछ संगठनों के अनुसार, देश में 50.2 फीसदी ऐसे बच्चे हैं। जो हफ्ते में सातों दिन काम करते हैं। और 53.22 फीसदी बच्चे यौन प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। जबकि, 50 फीसदी बच्चे शारीरिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। भारत के कई क्षेत्रों में छोटे-मोटे होटल और फैक्ट्रियां ऐसी है। जो बाल-मजदूरी करवा रहे है। और गरीबी के कारण बच्चों के माता-पिता उनको खुद इस दलदल में घसीटते है। और खुद बच्चे भी इसकी ओर खींचते चले जा रहे है। क्योंकि ना तो उनके पास कानून की समझ है। और ना ही रोजगार कमाने का कोई दूसरा जरिया।

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण रोजगार की कमी है। और उसके बाद शिक्षा का अभाव। गरीब और अशिक्षित होने के कारण भी मां-बाप अपने बच्चों को बाल मजदूर बनाने पर मजबूर हो जाते है। और पढने-लिखने और खेल-कूद करने की उम्र मे ये बच्चे जगह-जगह काम करते नजर आते है।

बाल मजदूरी की एक वजह अशिक्षा भी है। और जिसके लिए बच्चों में सबसे पहले शिक्षा के स्तर को बढ़ाना जरूरी है। जब तक देश के बच्चे शिक्षित नहीं होंगे। तब तक बाल श्रम जैसी समस्याओं के खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता है। क्योंकि, पढ़ाई लिखाई का अभाव देश की तरक्की के बीच हमेशा आड़े आती रहेगी। और अपने देश को तकनीकी रूप से बढ़ाने से पहले हमारे लिए जरूरी है। कि हम देश की मानसिकता का विकास करें। और सरकार को कोसने से पहले खुद इस ओर एक कदम बढ़ाएं।

गौरतलब, सरकार को बाल मजदूरी को रोकने के लिए कड़े नियम बनाने चाहिए। लेकिन सिर्फ सरकार ही नहीं, देश के नागरिक होने के नाते हमें भी अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। और जहां भी आपको बाल मजदूर दिखाई देते है। वहां देखकर अफसोस जताने से बेहतर होगा। कि आप अपनी आवाज बुलंद करें। और इस बारे में प्रशासन को सूचना दें। देश को तरक्की की ओर ले जाने में सरकार से ज्यादा देश के नागरिकों को अपना कर्तव्य निभाने की जरूरत है।

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