आम लोग भी करवा सकते अब प्राइवेट अस्पतालों में इलाज, सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए बनाई  ड्राफ्ट अडवाइजरी

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प्राइवेट अस्पतालों में आम लोगो को इलाज करना काफी मुश्किल पढ़ता हैं, क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में भारी-भरकम बिल हाथ में थमा दिया जाता हैं, जिससे लोग सरकारी अस्पतालों में ही जाना पसंद करते हैं, लेकिन अब आम लोग भी प्राइवेट अस्पतालों में जाकर अपना इलाज करवा सकते हैं, 9 सदस्यों की एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर ड्राफ्ट अडवाइजरी बनाई गई, जिससे आम लोगो के समक्ष रखा गया है इसके बाद दिल्ली नर्सिंग होम एक्ट के नियमों में बदलाव किए जाएंगे, जिसके बाद आम लोग प्राइवेट अस्पतालों में आसानी से अपना इलाज करवा पाएंगे, आम लोग इसलिए प्राइवेट अस्पतालों में नहीं जातें थे क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में दवाई की ज्यादा कीमत होती हैं, जिससे बिल बहुत ज्यादा होता था, और बिल में गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रही हैं, 100 रुपये के इंजेक्शन के 1000 रुपये, 400 रुपये की दवाई के 3000 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें मिली हैं अब दवाई के साथ सर्जरी के बिलों में भी कमी होगी, इलाज में काम न आने वाली दवाईयों के बिल को भी नहीं जोड़ा जा सकेगा,

जानिए ड्राफ्ट बिल में क्या-क्या बदलाव हैं..

केंद्र सरकार की नैशनल लिस्ट ऑफ एसेंसिएल मेडिसिन यानी एनएलईएम में शामिल दवाईयों की लिस्ट में से ही दवाई लिखी जाएगी. इन दवाईयों के रेट फिक्स होते हैं, अगर नॉन-एनएलईएम दवाईयां लिखनी पड़ी तो इन दवाईयों के लिए 50 पर्सेंट से ज्यादा मुनाफा नहीं लिया जा सकेगा, 50 पर्सेंट या एमआरपी में से जो भी कम होगा उतना बिल लिया जा सकेगा,

अगर नॉन एनएलईएम दवाई का खरीद 10 रुपये है, लेकिन एमआरपी 11 है तो फिर 50 पर्सेंट का फॉर्म्युला लागू नहीं होगा,  एमआरपी यानी 11 रुपये में दवाई देनी होगी। लेकिन अगर दवाई की खरीर 10 रुपये है और एमआरपी 20 है, तो उस स्थिति में खरीद मूल्य पर 50 पर्सेंट प्रॉफिट यानी 15 रुपये ही लिए जा सकेंगे, कन्स्यूमबल और डिस्पोजबल के लिए भी यही फॉर्म्युला लागू होगा,

कुछ आइटम में कई हजार का मुनाफा रखा जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अगर किसी ग्लव्स की कीमत 10 रुपये है तो अस्पताल इसके लिए 15 रुपये ही ले सकता हैं, लेकिन अगर एमआरपी 12 है तो फिर 12 रुपये ही लिए जा सकेंगा, कई मामलों में तो यह प्रॉफिट दो हजार पर्सेंट तक भी होता है, अगर ग्लव्स की कीमत दस रुपये है तो बिल में उसके 500-500 रुपये तक लगाकर दिखाए जाते हैं, सभी कैमिस्ट शॉप पर एनएलईएम दवाईयों का स्टॉक और लिस्ट मौजूद हो, तो दिल्ली सरकार फाइनल नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आम लोगों के लिए कंप्लेंट नंबर भी जारी करेगी और उस नंबर पर नियमों को न मानने वाले अस्पताल के खिलाफ कंप्लेंट की जा सकेगी,

एक्सपर्ट कमिटी इन्वेस्टिगेशन लैब्स में होने वाले टेस्ट की कैपिंग को लेकर कोई फॉर्म्युला तैयार नहीं कर पाई, और इसलिए अब एक सब कमिटी बनाई गई है, जो केवल टेस्ट के रेट्स को लेकर सिफारिश देगी, टेस्ट के रेट पर कई तरह की राय सामने आ रही थी और अब सब कमिटी अलग- अलग लैब्स और अस्पतालों में होने वाले टेस्ट के रेट्स को लेकर स्टडी करेगी और फिर बताएगी कि कौन से टेस्ट के लिए मैक्सिमम कितने रेट तय किए जा सकते हैं

प्राइवेट अस्पताल अपने यहां से दवाई खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे, दरअसल अभी तक दवाईयों पर डिस्काउंट का खेल देखने को मिलता था, अस्पताल में फॉर्मेसी पर पहले ही दवाई के रेट बहुत ज्यादा रखे जाते थे और फिर डिस्काउंट देने की बात कही जाती थी, इस प्रैक्टिस पर अब रोक लग पाएगी. किसी भी फॉर्मेसी से दवाई खरीदी जा सकेगी, सेकंड सर्जरी के लिए होंगे 50 पर्सेंट रेट, हाई रिस्क पैकेज में नॉर्मल पैकेज से 20 पर्सेंट से ज्यादा नहीं ले सकेंगे,

सरकार ने साफ कहा है कि अस्पतालों को पैकेज के बारे में मरीजों को क्लियर बताना होगा। अगर एक सर्जरी के बाद दूसरी सर्जरी की जरूरत होती है तो दूसरी सर्जरी के लिए 50 पर्सेंट रेट ही ले सकेंगे। इसके अलावा अस्पताल हाई रिस्क पैकेज देते हैं तो इस पैकेज के रेट नॉर्मल पैकेज से मैक्सिमम 20 पर्सेंट ही ज्यादा होंगे। अगर अस्पताल नॉर्मल पैकेज एक लाख का बताता है तो हाई रिस्क पैकेज मैक्सिमम 1.20 लाख तक का ही हो सकता है और उसके बाद इलाज पर चाहे कितना भी खर्च हो, 1.20 लाख से ज्यादा नहीं लिया जा सकता।

सरकार ने साफ कर दिया है कि अस्पताल का बिल न चुकाने की सूरत में डेड बॉडी को देने से इनकार नहीं किया जा सकता, अक्सर ऐसी शिकायतें आती रहती हैं कि अस्पताल डेड बॉडी को देने से मना कर देते हैं और पहले बिल का पूरा भुगतान करने की शर्त रखते हैं।

हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि सड़क दुर्घटना या दूसरी इमरजेंसी स्थिति में अस्पताल में मरीज का तुरंत इलाज करना होगा, दिल्ली सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायलों के लिए स्कीम भी लॉन्च की है, जिसमें दिल्ली में हुई सड़क दुर्घटना में घायलों के इलाज का खर्च दिल्ली सरकार उठाती है,

डॉक्टरों, स्टाफ की सैलरी कैश में नहीं दी जा सकती, 20 हजार या इससे ज्यादा की पेमेंट चेक या बैंकिंग चैनल से ही करनी होगी, इसके अलावा दवाईयों के पर्चेज कॉस्ट को ज्यादा नहीं दिखाया जा सकता क्योंकि ऑडिट में सारा सच सामने आ जाएगा, दिल्ली सरकार के पास दवाईयों के रेट की लिस्ट है और अगर कोई अस्पताल ज्यादा रेट दिखाता है तो उस पर ऐक्शन होगा…

अब आप असानी से प्राइवेट अस्पताल मे इलाज करवा सकते हैं, और अब पैसे भी ज्यादा देने की जरुरत नही होगी, और आपको लगता हैं, कि आपसे पैसे ज्यादा लिए जा रहें हैं, तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं, इसके लिए सरकार कदम उठाएंगी…

 

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