निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, दोषियों की फांसी की सजा बरकरार

निर्भया केस

निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. जिसमें गैंगरेप के तीन दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. वहीं दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी. कोर्ट सत्र के शुरु होने के पहले ही कोर्ट पहुंचे निर्भया के माता पिता ने एक बार फिल दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. जिस से लोगों को सबक मिल सके और किसी भी लड़की के साथ ऐसा ना हो, जो निर्भया के साथ हुआ था.

निर्भया की मां आशा देवी ने साथ ही कहा की, ‘हमारा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. क्योंकि निर्भया गैंगरेप दोषियों को अभी तक हुई सजा पर कार्रवाई नही हुई है.

इससे समाज में रह रही हर लड़की प्रभावित हो रही है. कोर्ट को जल्द ही इन दोषियों को फांसी पर लटकाना चाहिए. ताकि निर्भया को न्याय मिल सके.

जिसके बाद निर्भया केस के वकील रोहन महाजन ने कहा की, फैसला भले ही देर से आया. लेकिन परिणाम  के साथ आया. यह फैसला हमारे लिए विजयी क्षण है. साथ ही केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा की रोहन ने कहा कि दोषियों  पर जल्द से जल्द ही कार्रवाई की जाये. ताकि इतने दिनों से इंसाफ की आशा लगाये बैठे निर्भया के परिवार को इंसाफ  मिल सके.

चार दोषियों में से तीन की याचिका पर आया ये फैसला जाहिर है, काफी से देर से आया. ये सोचने वाली बात है की, निर्भया गैंगरेप जैसे घिनौने अपराध में भी जब हमारे संविधान और कानून को दोषियों को सजा देने में इतना वक्त लेना पड़ता है. तब जबकि दोषी से लेकर सबूत तक निर्भया के पक्ष में है. ऐसे में कानून से किसी भी तरह की उम्मीद महज उम्मीद मात्र है.

16 दिसंबर 2012 की उस रात निर्भया गैंगरेप ने जहां पूरे भारतवर्ष को सड़क पर निकलने पर मजबूर कर दिया था. वहीं आज 10 जुलाई 2018 का वक्त आ गया है. लेकिन अभी तक किसी भी दोषी को सजा ना मिल पाना ये दर्शाता है कि हमारा सविंधान किसी भी दोषी को सजा देने में कितना लचर है. इसी तरह न जाने कितनी ही वारदात, रेप, हत्या जैसी घटनायें हमारे समाज में रोज होती हैं. लेकिन जब निर्भया के दोषियों को सजा देने में कोर्ट 6 साल का वक्त ले सकता है तो जाहिर है. सभी केसों में कोर्ट और हमारा प्रशासन इससे अधिक वक्त लेता होगा. लेकिन अगर हमारे समाज में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं पर विराम लगाना है तो कोर्ट और प्रशासन को हर उन मामलों पर जल्द से जल्द सुनवाई कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए. जिससे समाज में रह रहा हर वो इंसान जो इन वारदातों को अंजाम देता है. वो इस तरह के अपराध करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर हो जाये.

 

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