तो क्या चुनाव में जीत के लिए हो रहा है छत्तीसगढ़ विधानसभा में तंत्र-मन्त्र !

छत्तीसगढ़

तो क्या छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत के लिए हो रहा है तंत्र-मन्त्र !

दिल्ली के बुराड़ी फांसी काण्ड को देखने के बाद हैरानी होती है कि कोई पढ़ा लिखा परिवार आख़िर कैसे अन्धविश्वास के चपेट में आ सकता है। मगर सिर्फ़ भाटिया फैमिली ही नहीं हमारे देश में कई ऐसे सरकारी अधिकारी और यहां तक की नेता भी हैं जो अंधविश्वासी हैं। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक ऐसा वाक्या हुआ जिससे आप मान जाएंगे कि सिर्फ़ आम जनता ही नहीं बल्कि वो नेता जिन्हे जनता अपने मार्गदर्शक के रूप में देखती है और उनका चयन कर के उन्हें इतनी जिम्मेदार कुर्सी सौंपती है वो नेता भी कम अंधविश्वासी नहीं होते। ये जानते हुए भी कि वो जो कर रहे हैं उसका असर हज़ारों लाखों लोगों पर पड़ेगा। खैर चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा माज़रा –

दरअसल छत्तीसगढ़ विधानसभा में सफ़ेद कपड़ो पहने नेताओं के बीच एक भगवा पहने और गले में दर्जनों माला लटकाए एक तांत्रिक की चहलकदमी दिखाई दी। गले में करीब 11 किलो वजनी मालाएं। सिर पर जटा, माथे पर बड़े टीके के साथ भभूत, हाथों की हर ऊंगलियों पर अंगूठियां… और भाव-भंगिमा भी कौतुहल जगाने वाली। इनका नाम रामलाल कश्यप है, जो की छत्तीसगढ़ के चांपा जांजगीर जिले के रहने वाले हैं।

ये 20 साल से तंत्र-मंत्र कर रहे हैं। रामलाल कश्यप टि्वटर पर सक्रिय भी हैं। उन्होंने अपने प्रोफाइल में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ खिंचवाई तस्वीर लगाई है। अपने परिचय में अध्यक्ष भाजयुमो, मंडल-मुलमुला, जिला-जांजगीर चांपा (छग) लिखा है। हालांकि फॉलोअर महज 11 हैं। वे खुद 226 लोगों को फॉलो करते हैं। अब तक उन्होंने 26 ट्वीट किए हैं।

दरअसल इन्हें पामगढ़ के विधायक अंबेश जांगड़े लेकर आए थे जिन्होंने इनका पास बनवाकर एंट्री दिलवाई थी। अब ये विधानसभा में क्यों आए थे ये भी हम आपको बता देते हैं। दरअसल कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी के विधायक इन बाबा को तंत्र मन्त्र से विधानसभा को बाँधने के लिए लेकर आए थे। ताकि प्रदेश में बीजेपी की सरकार बने। इसलिए तांत्रिक विधानसभा को अदृश्य शक्तियों से बांधने पहुंचे थे। जी हाँ, सही सूना आपने कि ये बाबा विधानसभा को बांधने आए थे। अब ये बांधना क्या होता है ये खुद में भी पहली बार ही सुन रही हूँ। इसके बाद क्या हुआ कि विधायक बृहस्पति सिंह ने स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल को इस बारे में बताया, तो स्पीकर खुद ही बोल पड़े- हां, मैंने तो साथ में फोटो भी खिंचाई है। अब बताइए कि स्पीकर तक इनके साथ फोटो खिचाए पहले से बैठे थे। खैर जितने मुँह उतनी बातें। तंत्र-मंत्र के सबूत सामने तो नहीं आए। भारी-भरकम जमावड़े के बीच किसी ने भी बाबा को तंत्र-मंत्र करते नहीं देखा। विधानसभा परिसर के अंदर बाहर कही भी ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे पता चलता हो कि यहां कोई तंत्र-मंत्र या पूजा-पाठ हुआ हो। लिहाजा, बीजेपी को भी कांग्रेस के आरोपों को लेकर उस पर पलटवार करने का मौका मिल गया। पार्टी ने दलील दी कि लगातार पंद्रह सालों से सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेसी ना केवल अंधविश्वासी हो गए हैं बल्कि उनकी बुद्धि भी भ्रष्ट हो गई है। अब कौन सच्चा है और कौन झूठा ये तो हम नहीं जानते मगर अफ़सोस होता है नेताओं की ऐसी सोच पर कि एक तांत्रिक किसी पार्टी को सत्ता दिला सकता है। मतलब नेता ये मानते हैं कि जनता का किसी पार्टी की जीत में कोई हाथ होता ही नहीं है बल्कि तांत्रिक विद्या करके जीत हासिल की जा सकती है। आपका इसपर क्या कहना है हमें कमेंट कर के जरूर बताएं।

 

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