पुणे के डॉ. गणेश बेटी होने पर नहीं लेते कोई फीस

डॉ. गणेश

देश के कई राजनीतिक दलों और नेताओं को आपने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं’ का नारा लगाते तो जरूर सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते है कि इनमें से कितने लोग है? जिन्होने इस नारें पर अमल करने की कोशिश की है। शायद नहीं, लेकिन आज हम आपको बतायेंगे एक ऐसे शख्स की कहानी। जिसने ना सिर्फ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं’ का नारा लगाया, बल्कि उस पर अमल भी कर दिखाया है।

हम बात कर रहें है। पुणे के रहने वाले डॉ. गणेश राख की। डॉ. गणेश ने अच्छे कामों की ओर अपना पहला कदम 2007 में उठाया था। जब उन्होने पुणे में जरूरतमंद लोगों के लिए एक अस्पताल खोला था। लेकिन इसके बाद 2012 में उन्होने अच्छाई की ओर इससे भी बड़ा कदम उठाकर लोगों को हैरान कर दिया।

और जनवरी 2012 में डॉ. गणेश ने बेटियों की हत्या के खिलाफ ‘बेटी बचाओ जनआंदोलन’ की शुरुआत की। उनके इस आंदोलन के चलते उन्होने अपने अस्पताल  में बेटियों की डिलिवरी होने पर फीस ना लेने का फैसला किया। पुणे के डॉ. गणेश अब तक अपने अस्पताल में 200 बेटियों की डिलिवरी करा चुके है। इसी के साथ डॉ. गणेश अपने अस्पताल में होने वाली हर बच्ची की डिलिवरी के बाद मिठाईयां तक बंटवाते है।

डॉ. गणेश ने बताया हैं, ‘डिलिवरी के दौरान मैं देखता था। कि कैसी बेटी होने पर मांओं के चेहरे से रंग उड़ जाता है। वहीं बेटे के जन्म पर पहले रिश्तेदार इकट्ठा होते थे। और जश्न मनाया जाता है। जबकि बेटी के जन्म की खबर मिलने पर सब गायब हो जाते हैं। इसलिए मैंने इस धारणा को बदलने की कोशिश की।’

डॉ. गणेश के इस अभियान में धीरे-धीरे कई शहरों के डॉक्टर्स जुड़ चुके है। पहले वो अकेले थे। लेकिन अब कई लोग आगे आकर उनके इस अभियान से जुडना चाह रहे है।

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