चकाचौंध की ज़िंदगी, अकेलापन और फिर आत्महत्या, कुछ ऐसी है इन तीनों हस्तियों की कहानी

चकाचौंध की ज़िंदगी, अकेलापन और फिर आत्महत्या, कुछ ऐसी है इन तीनों हस्तियों की कहानी

चकाचौंध की ज़िंदगी, अकेलापन और फिर आत्महत्या, कुछ ऐसी है इन तीनों हस्तियों की कहानी जाने माने आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज ने मध्य प्रदेश के इंदौर में अपने घर में लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। भय्यूजी महाराज को जबतक अस्पताल ले जाया गया तब तक भय्यूजी महाराज इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। भैय्यूजी महाराज के पास देशभर से उनके अनुयायी अपनी समस्याएं लेकर आते थे कि एक भैय्यूजी महाराज ही हैं जो उनको समाधान दे सकेंगे। अपने दुःख दूर करने के लिए उनके भक्त सिर्फ भैय्यूजी महाराज का ही नाम पुकारा करते थे। मगर कौन जानता था कि वो ख़ुद अंदर ही अंदर इतना घुट रहे हैं। दूसरों की तकलीफें दूर करते करते भैय्यूजी आखिर अपनी परेशानियों से अकेले ही जूझते हुए इस दुनिया से चले गए। भय्यूजी महाराज अपने पीछे लाखों करोड़ों चाहने वाले छोड़ गए। सिर्फ आम जनता ही नहीं देश की नामी हस्तियां भी उनसे मिलने आती थीं। मर्सेडीज जैसी महंगी गाड़ियों में चलने वाले भय्यू जी रोलेक्स ब्रैंड की घड़ी पहनते थे और आलीशान बिल्डिंग में रहते थे। एक किसान की तरह वह कभी अपने खेतों को जोतते-बोते दिखते थे, तो कभी क्रिकेट के शौकीन नजर आते थे। घुड़सवारी और तलवारबाजी में महारथ के अलावा कविताओं में भी उनकी दिलचस्पी थी। लेकिन फिर भी वो अपने अकेलेपन से पार न पा सके और जिंदगी खत्म कर ली। पुलिस को भैय्यूजी महाराज एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उन्होंने पारिवारिक कलह को मौत की वजह बताया है। भैय्यूजी महाराज की पहली पत्नी का निधन हो गया था जिसके बाद उन्होंने आयुषी से दूसरी शादी की मगर पहली पत्नी की बेटी और दूसरी पत्नी के बीच बनती नहीं थी जिस वजह से ही भैय्यूजी महाराज परेशान रहते थे। संत भय्यू महाराज असली नाम उदयसिंह देखमुख है। उनका जन्म वर्ष 1968 में हुआ था। वो शुजालपुर के किसान परिवार से ताल्लुक रखते है।

आत्महत्या करने वालों में भय्यूजी महाराज पहली नामी शख्सियत नहीं हैं, जिन्होंने आत्महत्या की। बल्कि मई महीने में देश के उन दो जाबांज अफसरों ने भी खुद को गोली मारकर जिंदगी खत्म कर ली जिनके भी लाखों चाहने वाले थे। जिनके सामने सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों के सिर भी सम्मान से झुक जाते थे। आज उन्होंने मौत के सामने घुटने टेक दिए। ऐसी ही दो हस्तियां और हैं जिन्होंने इसी एक महीने के अंदर मौत को गले लगा लिया।

हम बात कर रहे हैं मुंबई के सुपरकॉप कहे जाने वाले हिमांशु रॉय की तो दूसरे हैं यूपी एटीएस के अफसर राजेश साहनी।

हिमांशु रॉय

हिमांशु रॉय ने 12 मई को मुंबई में अपने घर में खुद को गोली मार ली तो वहीं राजेश साहनी, 29 मई को अपने दफ्तर में मृत मिले। खास बात ये है कि हिमांशु रॉय की मौत को भी अभी पूरा एक महीना हुआ है। मतलब एक महीने में तीन बड़ी हस्तियों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

हिमांशु मुंबई के पुलिस विभाग में संयुक्त आयुक्त और आतंकवाद निरोधक दस्ते जैसी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे हिमांशु रॉय 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। 23 जून, 1963 को मुंबई में ही जन्मे एवं पले-बढ़े रॉय की गिनती हाल के दिनों के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में होती थी। उनके नेतृत्व में कई महत्त्वपूर्ण मामलों का खुलासा हुआ। 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच का श्रेय हिमांशु रॉय को ही जाता है। रॉय 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले की जांच टीम का भी हिस्सा रहे। 11 जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की उपनगरीय ट्रेन में हुए सिलसिलेवार धमाकों की जांच में भी रॉय शामिल रहे थे। इन धमाकों में 209 लोग मारे गए थे, 700 घायल हुए थे। बॉलीवुड की कई हस्तियां हिमांशु को बेहद चाहती थी और उनके साथ भी हिमांशु का उठना बैठना था। मगर उनकी आत्महत्या की ख़बर ने हर किसी को हैरानी में डाल दिया। आख़िर इतने बड़े मामलों का खुलासा करने वाले, इतने बहादुर अफ़सर कैसे हार मान कर दुनिया छोड़ सकते हैं।

राजेश साहनी

राजेश साहनी पूरे पुलि महकमे में एक ऐसे अफसर थे, जो हर तरह के विवाद और चर्चाओं से दूर थे। तमाम मुशिकलों और काम के इतने बोझ के बाद भी उनका चेहरा हमेशा मुस्कराता रहता था। वो कभी हार मानने वालों में से नहीं थे। 1992 बैच के पीपीएस सेवा में चुने गए राजेश साहनी 2013 में अपर पुलिस अधीक्षक बने थे। 1969 में जन्मे राजेश साहनी ने एमए राजनीति शास्त्र से किया था। राजेश साहनी ने बीते सप्ताह आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी समेत कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। उत्तर प्रदेश पुलिस के काबिल अधिकारियों राजेश साहनी की गिनती होती है। इतनी काबिलियत, जुनून और दुनिया जीतने के बावजूद राजेश साहनी अंदर से कितने परेशान थे ये हर किसी को तभी पता चला जब वो इस दुनिया को छोड़ गए।

इन तीनों हस्तियों के जीवन को देखें तो शायद ही कोई ये सोच सकता है कि इनमें से कोई भी आत्महत्या कर सकता है। एक इंसान जिस चीज की भी ख़्वाइश रखता है वो सब तो इनके पास थी। मगर फिर भी तीनों अवसाद और तनाव से नहीं जीत पाए। तनाव इनकी ज़िंदगी में इस कदर हावी हो चुका था कि वो पैसों रुतवे और खुशियों से भी ज़्यादा ताकदवर हो गया था।

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