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देश के इस गांव में हिन्दू धर्म के लोग निकालते हैं मुहर्रम का ताजिया

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देश के इस गांव में हिन्दू धर्म के लोग निकालते हैं मुहर्रम का ताजिया

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भारत एक लोकतान्त्रिक देश है, जहाँ पर सबको अपने हितों और मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का पूरा-पूरा हक़ है. भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ पर विश्व के लगभग सभी धर्मों के लोग साथ रहते हैं. इस देश में सभी धर्मों के लोग आपस में मिलकर एक दूसरे का त्योहार मनाते हैं। सभी सौहार्द से रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से देश में द्वेष की भावना बड़े स्तर पर बढ़ी है और यहां के हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्मों के लोगों के बीच एक दूसरे के प्रति हीन भावना बढ़ रही है। जिससे कई जगहों पर हिंसा भी हुई है।

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बिहार के औरंगाबाद जिले का है ये अनोखा गांव

लेकिन एक पुरानी कहावत है, जहाँ पर बुराई होती है, वहीं पर अच्छाई भी होती है। जो लोग भारतवासियों को लड़वाने का काम करते है और जिस देश में रहते हैं उसी को तोड़ने की कोशिश करते हैं, ऐसे लोग इस समाज में कलंक हैं। इन सब लोगों से अलग हटकर आज भी देश में कुछ ऐसे लोग हैं जो दूसरो के लिए एकता की मिसाल पेश करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही गांव में के बारे में बताने जा रहे हैं जो देश में आपसी सद्भाव की मिसाल है। बिहार के औरंगाबाद का यह गांव देश मेें हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल है। आलम यह है कि हिन्दू-मुस्लिम के त्योहार और मुसलमानों के त्योहार मनाते हैं। मंगलवार को मुहर्रम के दिन यहां इस बार भी यह नजारा देखने को मिला।

हिन्दू लोगों के मुहर्रम पर ताजिया निकालने के पीछे की कहानी

हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी के दिन पर मुहर्रम के जुलूस के दिन सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि हिंदू समुदाय के लोगोें ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड के सोनडीह गांव में हिन्दू परिवारों ने मुहर्रम का जुलूस निकाला। आपको बता दें कि, इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। बावजूद इसके यहाँ के हिन्दू परिवार पूरे सौहार्द के साथ मुहर्रम का जुलूस निकालते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज से लगभग सौ वर्षो पहले सोनडीह गांव के टूका साव के पूवर्जों ने मन्नतें मांगी थी। जिसके बाद उनकी मन्नते पूरी हो गई। तब से लेकर आज तक उनके परिवार के सदस्य मुहर्रम में ताजिया का निर्माण कर जुलूस निकालते हैं और मौलाना से फातया कराते हैं।

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टूका साव का परिवार गांव के साथ मिलकर जुलूस निकालकर कर्बला में ताजिया पहलाम करता हैं। इस ताजिये का निर्माण भी हिन्दू परिवार के लोग साथ मिलकर करते हैं। साव परिवार के साथ-साथ गावों के अन्य लोग भी मिलकर ताजिया निर्माण में मदद करते हैं। उसके बाद सब मिलकर ताजिये का जुलूस निकालते हैं। सोनाडीह गांव के लोगों का मुहर्रम के दिन ताजिया निकालना अचंभित तो रहता ही है, लेकिन साथ ही पूरे देश के लोगों को आपसी सौहार्द का संदेश भी देता है। टूका साव और उनके गांव वालो से देशभर के लोगो को सीख लेने की जरूरत है। ताकि देश में आपसी भाईचारा बना रहे।

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