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पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार ने किया सम्मानित

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पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार ने किया सम्मानित

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पराली या अन्य फसल अवशेषों को किसानों द्वारा जलाने से होने वाले प्रदूषण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदम काफी कारगर सिद्ध हो रहे हैं। साल 2016 में सरकार ने इस समस्या से निजात दिलाने को लेकर किसानों को सुविधा देते हुए फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए जरूरी यंत्र उपलब्ध कराए थे, जिसके परिणाम अब बड़े स्तर पर दिख रहे हैं। पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के कई किसानों ने सरकार की इस योजना से जोड़ा है। मंगलवार को ऐसे ही किसानों को सरकार की ओर से संम्मानित किया गया।

3 सालों में पराली जलाने की समस्या में 50 फिसदी तक कमी आई है

किसानों को पराली के बेहतर प्रबंधन को लेकर सरकार के जागरूक करनेवाले कार्यक्रम के जरिए पिछले 3 सालों में पराली जलाने की समस्या में 50 फिसदी तक कमी आई है। इसी के लिए कृषि मंत्रालय द्वारा एक किसान सम्मलेन का आयोजन कर फसल अवशेष जलाने की क्रिया में कमी लाने के लिए किसानों को धन्यवाद दिया गया। इस दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने सभी गांवों में फसल अवशेष जलाने के मामलों को शून्य पर लाने को सुनिश्चित करने के लिए किसानों से आगे भी समर्थन देने और सरकार को अपने विचार देने का अनुरोध किया।

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पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के किसानों के लिए पराली प्रबंधन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि इन राज्यों की सफलता की कहानियों को सभी किसानों संग साझा किया जाना चाहिए। किसानों द्वारा साझा किए गए अच्छे अनुभवों को सुनने के बाद मंत्री ने प्रसन्नता जाहिर की और उनसे अनुरोध किया कि वे इस सम्मेलन से सीखी गई बातों को लेकर अन्य किसानों को भी जागरूक करें। चार राज्यों के 1000 से ज्यादा किसानों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।

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वर्ष 2017 एवं 2016 के मुकाबले क्रमशः 15% और 41% की कमी आई है

किसानों और राज्य सरकारों की चिंताओं को दूर करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन आईसीएआर के सहयोग से किया गया था। डा. नागेश सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं में  वर्ष 2017 एवं 2016 के मुकाबले क्रमशः 15% और 41% की कमी आई है। इस सम्मेलन के दौरान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 20 किसानों का चिन्हित कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों के प्रबंधन में बहुमूल्य योगदान देने, साथ ही साथ अपने गांव के अन्य किसानों को फसल अवशेषों का मौके पर ही प्रबंधन कर उन्हें पराली न जलाने को प्रेरित करने के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान कृषि राज्य मंत्री ने किसानों द्वारा 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित सीएचसी की कस्टम हायरिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए एक बहुभाषी मोबाइल एप ‘सीएचसी फार्म मशीनरी’ की भी शुरुआत की।

पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार ने किया सम्मानित
पराली का सही प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार ने किया सम्मानित

बताते चलें कि वायु प्रदूषण को दूर करने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकारों के प्रयासों का समर्थन करने और कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से फसल अवशेषों के मौके पर ही प्रबंधन को लेकर आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी देने की खातिर मंत्रालय ने 2018-19 से 2019-20 की अवधि के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की है। इसके लिए कुल 1151.80 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि की व्यवस्था की गई है।

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