हाथ नहीं तो क्या अपने हुनर से दूसरों के घरों को सजाती हैं सुदर्शना

हाथ नहीं तो क्या अपने हुनर से दूसरों के घरों को सजाती हैं सुदर्शना महिला सश्क्तिकरण से प्रेरित आज हम एक ऐसी महिला के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। जिनके हाथ न होने के बावजूद भी वो चीढ की पत्तियों से सुन्दर-सुन्दर घरेलू वस्तुऐ बना कर ,समाज की बाकि दिव्यांग महिलओं के लिए एक मिशाल बन रही हैं।

हाथ नहीं तो क्या अपने हुनर से दूसरों के घरों को सजाती हैं सुदर्शना महिला सश्क्तिकरण से प्रेरित आज हम एक ऐसी महिला के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। जिनके हाथ न होने के बावजूद भी वो चीढ की पत्तियों से सुन्दर-सुन्दर घरेलू वस्तुऐ बना कर ,समाज की बाकि दिव्यांग महिलओं के लिए एक मिशाल बन रही हैं। हम बात कर रहें हैं, कांगड़ा के रैत की रहने वाली सुदर्शना की। जिन्होंने मात्र डेढ़ साल की उम्र में अपना हाथ खो दिया था। दरअसल डेढ़ साल की उम्र में सुदर्शना अपनी चेचेरी बहन के साथ बरामदे में खेल रही थी। तो खेलते वक्त सुदर्शना का बायां हाथ अंगीठी में पड़ गया जिससे उनकी सारी उंगलियां झुलस गईं थी। मगर इसके बावजूद न सिर्फ उन्होंने आज अपने आप को सशक्त बनाया हैं बल्कि वो हजारों महिलाओं को हुनर सिखाकर उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ रही हैं।

चीड़ की बात करें तो चीड़ के पेड़ अधिकतर पहाड़ी इलाकों में पाऐ जाते हैं। चीड़ की लकड़ी काफी आर्थिक महत्व की हाती है। विश्व की सब उपयोगी लकड़ियों का लगभग आधा भाग चीड़ द्वारा पूरा होता है। जैसे पुल निर्माण में, बड़ी बड़ी इमारतों में, रेलगाड़ी की पटरियों के लिये, कुर्सी, मेज, संदूक और खिलौने इत्यादि बनाने में इसका उपयोग होता है।

लेकिन चीड़ की पत्तियों का इस्तेमाल नही होता इसलिए बेकार चीड़ की पत्तियों से सुदर्शना घरेलू और सजावटी उत्पाद बनाती हैं। जैसे चपाती बॉक्स, फूलदान, टेबल मैट, पेन बॉक्स, ट्रे आदि। सुदर्शना ने अब बाकी ग्रामीण महिलाओं को अपने पांव पर खड़ा करने की ठानी हैं। अब वो अपने हुनर को स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं तक पहुंचा रही हैं। सुदर्शना अब तक हजारों महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। सुदर्शना से सीख कुछ महिलाएं अपने उत्पादों को स्टॉलों और प्रदर्शनियों में बेचकर आज अपना घर चला रही हैं।

सुदर्शना पर्यटन विभाग के स्वरोजगार कार्यक्रम से भी जुड़कर प्रशिक्षण देती हैं और कांगड़ा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की छात्रों को भी ट्रेनिंग देती हैं। यंहा तक कि सुदर्शना को नवाचार स्टार्टअप इंडिया की ओर से हीरो ऑफ द स्टेट अवार्ड से भी नवाजा जा चुकी हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने सुदर्शना को 65 प्रतिशत हाथ जलने का दिव्यांगता का प्रमाण पत्र भी दिया हुआ हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने आप को दिव्यांग नही माना।

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