बच्चों की खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार पिता…

बच्चों की खुशी

माता पिता के लिए उनके बच्चों की खुशी सबसे पहले हैं. बच्चों की खुशियों के लिए उनके माता-पिता तो कुछ भी करने को तैयार हो सकते हैं और करते भी हैं. इस बात के कई उदाहरण अपने देखे भी होगे और सुने भी होंगे. हम भी आज आपको एक ऐसे ही पिता के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके संघर्ष की कहानी किसी भी पिता के लिए प्रेरणा से कम नही हैं. उन बच्चों के लिए भी सिख हैं जो अपने माता पिता को अकेले छोड़ देते हैं और अपने माता पिता को बोझ समझते हैं.  हम आपको लाहौर के एक कुली पिता के बारे में बताने जा रहे हैं.

सबसे पहले आपको परिचय देते हैं लाहौर के इस पिता का  इनका नाम है यूसिफ,  दरअसल लाहौर के ही सलीम काज़मी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक ट्रिप के दौरान किसी कुली के साथ हुई छोटी सी मुलाकात का किस्सा शेयर किया है. इस बारे में वह लिखते हैं कि, ‘कल रात लाहौर रेलवे स्टेशन पर 10 मिनट के लिए मेरी मुलाक़ात यूसिफ़ नाम के एक कुली से हुई. वो यहां पर 20 सालों से काम कर रहे थे. जब उनके बच्चे पढ़ लिख लिए, तो यूसिफ़ ने कुली की नौकरी छोड़ दी थी’.

इसके आगे सलीम लिखते हैं कि साल 2008 में यूसिफ़ के बेटे ने जिस यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की थी. उसे वहीं पर लेक्चरार की जॉब मिल गयी. बेटे की नौकरी लगने से पूरा परिवार ख़ुश था, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था. यूसिफ़ ने एक सड़क दुर्घटना में अपने इकलौते बेटे को खो दिया.

जवान और इकलौते बेटे की मौत से पूरा परिवार सदमे में था और पूरी तरह से बिखर चुका था. यूसिफ़ ने जैसे तैसे अपने परिवार को संभाला. इसके बावजूद बेटे की आस में उन्होंने जो कुली की नौकरी छोड़ दी थी, अब उसे दोबारा करने के अलावा उनके पास दूसरा और कोई रास्ता नहीं था.

2008 में ही यूसिफ़ परिवार को संभालने के लिए लाहौर रेलवे स्टेशन पर कुली की नौकरी पर वापस लौट आये. तब से लेकर अब तक वो इस उम्र में भी कुली का काम करने को मजबूर हैं. अब आलम ये है कि उनका एक कंधा पैरालाइज़ हो चुका है. बोझ उठाते वक़्त उनके हाथ कांपने लगते हैं. इसके बावज़ूद यूसिफ़ अपनी दोनों बेटियों को क़ाबिल बनाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत में आज भी लगे हुए हैं. ऐसे पिता के लिए आप क्या कहेंगे और उन बच्चों को क्या कहेंगे जो कामने के बाद अपने माता पिता को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं. ऐसे लोगों से गुजारीश हैं जो आपको जिंदगी भर अपनी आखों पर बिठा कर रखते हैं उनको छोड़ने से पहले यह याद कर लीजिए की उन्होंने आपकों कितनी मेहनत से बड़ा किया हैं आपकों कामयाब बनानें में उन्होंने क्यों खोया हैं.

 

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