Thu. Jul 18th, 2019

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देश में संस्कृत बोलने वाला एकमात्र गांव है कर्नाटक का मत्तूरु गांव

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मत्तूरु गांव

मत्तूरु गांव कर्नाटक राज्य की तुंग नदी के किनारे बसा हुआ है। प्राचीन काल से ही मत्तूरु गांव में संस्कृत भाषा बोली जा रही है।33 साल पहले पेजावर मठ के एक स्वामी ने मत्तूरु गांव को संस्कृत भाषी गांव घोषित कर दिया। मत्तूरु गांव में करीब 500 से भी ज्यादा परिवार रहते है। मत्तूरु गांव के सभी बच्चे स्कूलों में प्राथमिक भाषा के रूप में संस्कृत ही पढ़ते है।

भारत में जहां लोग संस्कृत भाषा को भूलते चले जा रहे है। वहीं इसी देश में एक ऐसा गांव भी है। जहां का बच्चा-बच्चा संस्कृत बोलता दिखाई देता है। गांव में रहने वाला कोई भी व्यक्ति चाहें वो हिंदू हो या मुस्लिम सभी संस्कृत भाषा में बात करते नजर आते है। जी हां, हम बात कर रहे है। कर्नाटक राज्य की तुंग नदी के किनारे बसे मत्तूरु गांव की। ये गांव बेंगलुरु से 300 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।

प्राचीन काल से ही इस गांव में संस्कृत भाषा बोली जा रही है। हालांकि, बीच के कुछ समय के लिए गांव के लोगों ने कन्नड़ भाषा का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। लेकिन, यहां कन्नड़ भाषा केवल 1981-1982 तक ही बोली गई। इसके बाद लगभग 33 साल पहले पेजावर मठ के एक स्वामी ने मत्तूरु गांव को संस्कृत भाषी गांव घोषित कर दिया। और सिर्फ 10 दिनों तक लगातार 2 घंटे का अभ्यास कर पूरा गांव संस्कृत में बात करना सीख गया। और उस दिन के बाद से मत्तूरु गांव में कभी हिंदी या कन्नड भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया। यहां के सभी लोग आपस में बातचीत करते समय भी संस्कृत भाषा का प्रयोग करने लगे।

मत्तूरु गांव में करीब 500 से भी ज्यादा परिवार रहते है। जिनकी कुल संख्य लगभग 3500 के आस-पास होगी। और फिलहाल यहां के सभी लोग संस्कृत को बखूबी समझते है। इतना ही नहीं, मत्तूरु गांव के सभी बच्चे स्कूलों में प्राथमिक भाषा के रूप में संस्कृत ही पढ़ते है। हालांकि, देश में संस्कृत बोलने वाले इस एकमात्र गांव के कई नौजवान बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुके है। तो कई बड़े शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं। मत्तूरु गांव तरक्की के मामले में भी किसी से पीछे नहीं रहा है। दुनिया भर से लोग इस गांव में केवल संस्कृत सीखने के माध्यम से ही आते है। गौरतलब, इस गांव की एक सबसे खास बात यह भी है। कि इस गांव में आज तक कभी भूमि-विवाद नहीं हुआ है। और साथ ही, जिले में मत्तूरु गांव के स्कूलों का अकादमिक रिकॉर्ड सबसे अव्वल नंबर पर है।

 

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