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कोडिन्ही गांव- जहां पैदा होते हैं सिर्फ जुड़वां बच्चे, इसे कहा जाता हैं Twin Town

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कोडिन्ही गांव

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रहस्य.. ये एक ऐसा शब्द हैं, जिसको सुनते ही हमारे आस-पास बैठे लोगों के कान एक दम से चौकन्ने हो जाते हैं.. और आज मैं आपको बताऊंगी हमारे ही देश के एक ऐसे गांव के बारे में जहां पैदा होते हैं जुड़वां बच्चे… सिर्फ जुड़ंवा बच्चे ही नहीं.. यहां हर उम्र के जुड़वां जोड़े आपको देखने को मिलेंगे..

और खास बात तो ये है कि, इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों के पीछे क्या रहस्य या वजह हैं.. इसकी पक्की जानकारी अच्छे-अच्छे वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए हैं… चलिए आपको बतातें हैं केरल के मलप्पुरम जिले के कोडिन्ही गांव के बारे में… जिसे जुड़वां बच्चों का गांव भी कहा जाता हैं…

साल 2008 में देश में जुड़वां बच्चों की संख्या को जानने के लिए जब इस गांव का सर्वे किया गया था.. तब पता चला कि, करीब 280 जुड़वां लोगों के जोड़े इसी गांव में रहते हैं.. और इसके बाद अक्टूबर 2016 में London germeny, भारत के हैदराबाद औऱ केरल के Research Scientists की टीम ने मिलकर कोडिन्ही गांव में इतनी संख्या में जुड़वां बच्चे पैदा होने के पीछे की वजह जानने के लिए यहां का दौरा किया लेकिन इसके बाद भी Scientist इसके पीछे की किसी ठोस वजह का पता नहीं लगा पाए…

आपको बता दें कि, एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में जुड़वां बच्चों के पैदा होने का औसत 1000 बच्चों पर 4 बच्चों का है। लेकिन यही औसत भारत में 1000 बच्चों पर 9 जुड़वां बच्चों तक है। तो वहीं बात अगर केरल के कोडिन्ही गांव की करें तो, इस रहस्यमयी गांव में 1000 बच्चों पर 45 बच्चे पैदा होते हैं। और इस औसत के हिसाब से देखा जाए तो ये पूरी दुनिया में जुड़वां बच्चों की सबसे ज्यादा आबादी वाला दूसरे नंबर का गांव हैं… हालांकि, एशिया में इसकों पहले स्थान का दर्जा मिला हैं.. और जहां बात दुनिया की आती हैं, तो हम आपको बता दें कि, विश्व में पहले नंबर पर नाइजीरिया का इग्बो-ओरा गांव हैं… जहां पर 1000 में से 145 बच्चे जुड़वां पैदा होते हैं..

आपको बता दें कि, कोडिन्ही गांव में रहने वाले जुड़वां जोड़ों में सबसे उम्रदराज 65 साल के अब्दुल हमीद और उनकी जुड़वा बहन कुन्ही कदिया है। ऐसा माना जाता है इस गांव में तभी से जुड़वां बच्चे पैदा होना शुरू हो गए थे। हालांकि, शुरू के सालों में कोई इक्का दुक्का जुड़वा बच्चे पैदा होते थे… लेकिन बाद में इसमें तेज़ी आई और अब तो बहुत ही ज्यादा रफ़्तार से जुड़वां बच्चे पैदा हो रहे हैं। और इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि कुल जुड़वां लोगो के आधे यानि की 50% पिछले 10 सालो में ही पैदा हुए हैं।

खैर इस गांव की जुड़वां आबादी इसे पूरे एशिया में जितना खास और अलग बनाती हैं…उससे कई ज्यादा यहां के लोगों के लिए मुसीबत का सबब भी बन जाती है.. यहां के आम लोगों को अपना जुड़ंवा बच्चों की वजह से काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता हैं…

खासकर यहां के टीचर्स के लिए स्टूडेंट्स को पहचानना किसी सिर दर्दी से कम नहीं हैं.. घर में अगर बच्चा बीमार हो तो दोनों बच्चों को दवाई पिलाने जैसी समस्या यहां आम बात है। और बस इतना ही नहीं, किसी newly married couple के लिए अपने partner को पहचानना कुछ वक्त तक काफी मुश्किल हो जाता हैं..

हर घर में एक जैसे दिखने वाले ये बच्चे बेहद प्यारे लगते हैं। इनके जुड़वां होने के चलते ये सभी ज्यादातर एक जैसे कपड़े ही पहनते हैं… मुस्लिम आबादी वाले इस गांव में करीब 2000 लोग रहते है। जिनमें से करीब 300 लोग जुड़वां हैं। ऐसे में आपको इस गांव में हर जगह, स्कूल से लेकर पास के बाजार में कई हमशक्ल नजर आ ही जाएंगे।

 

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