गरीबी और सपनों की जंग को लड़कर शिवा कटवाल गरीब बच्चों को दे रहे है आजादी की खुशी

शिवा कटवाल

पढ़-लिखकर कुछ कर दिखाने का सपना तो हर कोई देखता हैं लेकिन जरूरी तो नहीं, कि हर किसी का सपना पूरा हो जाए। खैर जरूरी तो बहुत दूर की बात हैं, अक्सर गरीब लोगों के सपने अधूरे ही रह जातें है। ये गरीबी कई सपनों, और उम्मीदों की बली चढ़ा देती हैं। मगर ऐसी ही गरीबी से लड़ते-लड़ते एक युवक ने आज न सिर्फ खुदके सपनों के लिए जंग लड़ी हैं, बल्कि और भी कई गरीब बच्चों की जिंदगियों को संवारने का जिम्मा उठाया हुआ हैं।

ये स्वतंत्रता का सारथी उन गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहा हैं, जिन तक सरकारें भी नहीं पहुंच पाई हैं। गरीबी और सपनों की जंग को लड़कर अपने सपनों को साकार करने वाली ये कहानी हैं 36 साल के लेख बहादूर छेत्री की, जिन्हे लोग शिवा कटवाल के नाम से जानते हैं।

पश्चिम बंगाल के रहने वाले शिवा कटवाल गरीबी और लाचारी के चलते खुद सही ढंग से पढ़ाई नहीं कर पाए। मगर, आज वो अपने ‘खुशी’ शिक्षा केंद्र के जरिए इलाके के करीब 40 जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

वैसे तो शिवा कटवाल ने साल 2000 में डॉ. आई. बी. थापा मेमोरियल नेपाली हाईस्कूल से 10वीं की पढ़ाई पूरी की थी। लेकिन इसके आगे की पढ़ाई करने के लिए उनके पास पैसों की कमी थी। उनकी गरीबी उनके सपनों के आगे आज भी रोड़ा बनकर खड़ी थी। लेकिन अपने सपनों को टूटता देख उन्हे ये एहसास हुआ कि, उनकी ही तरह दुनिया में कई और बच्चे गरीबी के चलते पढ़-लिख पाने में असमर्थ हैं। इस एहसास के बाद शिवा ने उन बच्चों के लिए कुछ करने की ठान ली।

इसी एहसास के साथ शिवा कटवाल ने अप्रैल 2000 में अपने शिक्षा केंद्र खुशी की बुनियाद डाल दी, जो कि आज कई गरीब बच्चों के लिए खुशी का केंद्र हैं। हालांकि, उनके पास अपना कोई भवन या ढंग का घर नहीं हैं। मगर फिर भी वो स्थानीय कराईबाड़ी देवराली युवा संघ में अपने शिक्षा केंद्र खुशी को चलाते हैं।

शिक्षा केंद्र खुशी में हर धर्म के बच्चें शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इसी के साथ, इन बच्चों में मौजूद लड़कियों को खासतौर पर कराटे की शिक्षा भी दी जाती हैं। वैसे तो अब तक इस शिक्षा केंद्र में बच्चों को जमीन पर बैठाकर शिक्षा दी जाती थी, लेकिन हाल ही में कुछ महीने पहले इस शिक्षा केंद्र को लॉयंस क्लब ऑफ सिलीगुड़ी शताब्दी की ओर से 14 बेंच-डेस्क मिले हैं।

इतना ही नहीं, जहां पहले इस शिक्षा केंद्र को शिवा कटवाल अकेले संभाला करते थे, वहीं अब दो साल पहले से स्थानीय छात्र नवराज शर्मा और उद्धव शर्मा के साथ-साथ कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके डबल डैन रामचंद्र सुबेरी भी उनके साथ अपना सहयोग दे रहे हैं।

आपको बता दें कि, तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए शिवा ने साल 2012 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपेन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की है, और अब इग्नू से समाज शास्त्र में डिग्री की पढाई कर रहे हैं। शिवा इलाके में लोगों के घरों के निर्माण में सीमेंट मसाला बनाने और अन्य मजदूरी का काम करते रहते हैं। लेकिन साथ ही वो शिक्षा की आजादी के अपने मिशन में खोए हुए हैं। उन्हें बस इसी बात की खुशी है कि उनका ‘खुशी’ आज बहुत से गरीब बच्चों के लिए आजादी की ‘खुशी’ है

 

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