कुपोषण मुक्त भारत की तरफ छत्तीसगढ़ सरकार ने बढ़ाया अपना पहला कदम

कुपोषण

भारत में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपना पहला कदम बढ़ाया है। उन्होने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घरों और आंगनबाड़ी केंद्रों में हरी सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करने की पहल की है।

महिला एवं बाल विकास केंद्र ने बताया कि, हरी सब्जियों मे प्रोटीन और विटामिन सबसे अधिक प्रोटीन और विटामिन पाया जाता हैं, और इनमें पोषक तत्वों की भी अच्छी मात्रा होती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा उगाई जाने वाली सब्जियों से वहां पढ़ने वाले बच्चों को तो इसका लाभ मिल ही रहा है लेकिन साथ ही, उन महिलाओं को भी इससे फायदा मिल रहा है जो आंगनबाड़ी में सब्जी उगाने का काम कर रही हैं।

सुकमा जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर बोडेले ने बताया कि, साल 2016-17 में करीब 200 आंगनबाड़ी केन्द्रों के सर्विस एरिया में 1,000 बच्चों के घरों में सब्जी उत्पादन किया गया था।

आमतौर पर गांवों में नल से निकलने वाले पानी का एक बार ही इस्तेमाल किया जाता है, उसके बाद वो पानी नालियों के जरिये बह जाता है। लेकिन महिला एंव बाल विकास के इस कार्य के जरिये नल से बहने वाली पानी का इस्तेमाल सब्जियों को उत्पादन में किया जाता है।

सुधाकर बोडले ने कहा कि, इन सब्जियों के लिए इन सब्जियों के लिए बीज की व्यवस्था कृषि विभाग और उद्यान विभाग द्वारा मिलकर की जाती है। महिलाओं द्वारा उगाई गई सब्जियों का प्रयोग आंगनबाड़ी केंद्रों में खाना बनाने के लिए किया जाता है।

इतना ही नहीं, इस खाने को आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले 3 से 6 साल के बच्चों को मिड डे मील के तौर पर दे दिया जाता है। भोजन के मेन्यू के मुताबिक बच्चों को सप्ताह में कम से कम 3 दिन हरी सब्जी मिलनी ही चाहिए। घरों में सब्जी के उत्पादन की योजना से इस लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। जहां पिछले मॉनसून में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों पर सब्जी उत्पादन किया गया था, तो वहीं इस साल पूरे जिले के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस पहल ने सफलता हासिल की है, और लगभग 600 कुपोषण के शिकार हुए बच्चों के घर पर सब्जी का उत्पादन किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार के ये मुहिम कुपोषण के खिलाफ चलाई गई थी। जिसने अब काफी हद तक अपने लक्ष्य को पूरा भी कर लिया है। उम्मीद की जा रही है कि, आने वाले समय में पूरा छत्तीसगढ़ राज्य ही कुपोषण की समस्या से निजात पा लेगा

गौरतलब है कि, देश में हर साल 3000 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार होने से अपनी जान गवां रहे हैं। इसका असर सीधा देश के विकास पर भी पड़ रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले जैसी कोशिश अगर देश के बाकी इलाकों में भी की जाए तो, हमारे देश को जल्द ही कुपोषण मुक्त देश भी घोषित किया जा सकता है।

 

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