किसान आत्महत्या : कर्नाटक में 210 किसानों की आत्महत्या पर मुआवजा सिर्फ 35 को ही मिला

किसान आत्महत्या

किसान आत्महत्या : कर्नाटक में 210 किसानों की आत्महत्या पर मुआवजा सिर्फ 35 को ही मिला कर्नाटक में जब एचडी कुमारस्वामी चुनावों से पहले भाषण दिया करते थे तो वो ज़्यादातर किसानों की कर्जमाफी की ही बात किया करते थे। यही नहीं शपथ ग्रहण के बाद भी मुख्यमंत्री ने किसानों की कर्जमाफी की बात कही थी। बात करें बजट सत्र की तो ढोल पीट कर वहां भी इसका बाकायदा ऐलान किया गया था। मगर धरातल पर असल हक़ीकत कुछ और ही है। क्योंकि खुदकुशी करने वाले किसानों में अब तक सिर्फ कुछ ही किसानों को मुआवजे का लाभ मिला है।

किसान आत्महत्या:  वर्ष 2017 से लेकर 2018 के जून तक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां पर 210 किसानों ने आत्महत्या की है। इतना ही नहीं जिन 201 किसानों ने आत्महत्या की है, उनमें से सरकार ने सिर्फ 35 किसानों को मुआवजा दिया है।

आपको बता दें कि किसानों को मुआवजा देने में देरी के कई कारण हैं। जब कोई किसान आत्महत्या करता है तो उसका शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जाता है। जिसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को कमिटी के पास भेजा जाता है। कमिटी इस रिपोर्ट को डीएम के पास भेजती है। जिला कलेक्टर किसान की आत्महत्या की पूरी रिपोर्ट तैयार करते हैं और फिर इस रिपोर्ट को सरकार के पास भेजते हैं। तब जाकर सरकार रिपोर्ट को ठीक से देखने के बाद किसानों को मुआवजा देती है। इस तरीके से ये प्रक्रिया काफ़ी लम्बी है और इसमें काफ़ी वक़्त लग जाता है।

अगर बात करें अप्रैल 2017 के आंकड़ों की तो 604 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से 404 केस रिपोर्ट किए गए और उनमें से 387 पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिला। नवंबर 2017 में सिद्धारमैया सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक तत्कालीन सीएम से लेकर मौजूदा सीएम तक कुछ भी नहीं कर सके। ये प्रक्रिया इतनी लम्बी है कि किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं सरकार ने एक और पहल की थी कि आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चों को फ्री शिक्षा दी जाएगी लेकिन आज तक इस योजना का लाभ सिर्फ 20 छात्रों को ही मिला। सबसे दुखद बात तो ये है कि भाषण के बाद से अब तक 30 किसान और आत्महत्या कर चुके हैं। अब सोचिए कि जब भाषण के दौरान जिन किसानों को मुआवज़ा देने की बात की गई थी उन्हें ही अब तक मुआवजा नहीं मिला तो सरकार बनने के बाद जिन किसानों ने आत्महत्या की उनके परिवारों मुआवजा कब मिलेगा। अब किसान संघठनों ने सरकार से कहा है कि इस प्रॉसेस को आगे बढ़ाया जाए। हमारा मानना ये है कि किसानो द्वारा आत्महत्या मुआवजे की बुरी आदत डालने की वजाय किसानो द्वारा आत्महत्या का कारण पता करके किसानो की समस्या का समाधान किया जाना चाहिए ताकि फिर कोई किसान आत्महत्या ना करे।

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