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28 साल की उम्र में किसानों को मुनाफे की खेती करना सिखाते हैं, आकाश चौरसिया सागर

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आकाश चौरसिया सागर

28 साल की उम्र में किसानों को मुनाफे की खेती करना सिखाते हैं, आकाश चौरसिया सागर

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आज 28 साल की उम्र में किसानों को आकाश चौरसिया सागर मुनाफे की खेती करना सिखा रहे हैं. जो अपनी खेती के दम पर देश के युवा से लेकर देश के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं. जिसको देखकर पता चलता है कि, जरुरी नहीं की आप ऊंची ऊंची बिल्डिंग में काम करें जमीन और खेती से जुड़कर भी आप काफी कुछ कमा सकते हैं. उन्हीं में से एक किसान हैं आकाश चौरसिया सागर जो मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, जोकि देश के युवा हैं, अपनी किसानी और मुनाफे के चलते अभी तक देश के कई राज्यों के हजारों किसानों को मुनाफे की खेती सुखा चुके हैं. क्योंकि वो कम लगात में ज्यादा मुनाफा देने की विधियां किसानों को समझाते हैं.

किसी समय में एक डॉक्टर का ख्वाब रखना वाला आकाश चौरसिया लोगों का इलाज करना चाहता था. हालांकि उसे जल्द ही ये समझ आ गया कि, लोगों की बीमार की मुख्य वजह खानपान की है. जिसके चलते आकाश ने अपना फैसला बदल लिया. वो लोगों का डॉक्टर तो नहीं बन सका हालांकि फसलों का डॉक्टर बन गया. मध्य प्रदेश के सागर जिले के रेलवे स्टेशन से छह किलोमीटर दूर राजीव नगर तिली सागर के रहने वाले आकाश चौरसिया की उम्र अभी महज 28 साल है. लेकिन कहते हैं ना कि, ख्वाबों को अपनी पहचान देना हो तो कुछ अलग करना होता है. बस तब से आकाश चौरसिया ने चीजें समझनी की, जैसे की आजकल किसान सब्जियों और अनाज में इतने कीटनाशक और रासायनिक उवर्क इस्तेमाल करते हैं. जो तमाम तरह की बीमारियों का कारण होता है. इसलिए आकाश को लगा की इस समय डॉक्टर बनकर इलाज़ करने से अच्छा है कि खेती करके लोगों को शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जाये. जिससे लोगों को बीमार पड़ने और इलाज़ तक की नौबत ना आये.

यही सोच लेकर साल 2011 में आकाश ने 10 डिसमिल से जैविक खेती करनी शुरू की थी. आज आकाश पूरे देश में साढ़े छह हजार किसान और 250 युवाओं के सहयोग से 18 हजार एकड़ खेती जैविक ढंग से करा रहे हैं. आज आकाश की प्रशिक्षा का ही असर है कि, आकाश जहां भी जाते हैं तो किसानों को अपने आप से जोड़ पाते हैं और लोगों को बेहतर खेती करने के सुझाव दे पाते हैं. आकाश के मॉडल फॉर्मिंग की आज के समय में हर जगह चर्चा है. कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए आकाश को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं. कम लागत में ज्यादा मुनाफा आकाश ने अपने तीन एकड़ खेत को मॉडल फॉर्म के रूम में विकसित किया है. एक साथ चार से पांच फसल लेकर लागत चार से पांच गुना कम करने के साथ ही मुनाफा में भी पांच गुना इजाफा किया है. आकाश वर्मी कम्पोस्ट से लेकर सभी जैविक खादें, डेयरी फॉर्म, मल्टीलेयर फ़ूड फॉर्मिंग खुद ही करते हैं.  इन सबके साथ आकाश हर महीने की  27, 28 तारीख को पूरे देशभर के कई किसान अपने यहां निशुल्क प्रशिक्षण  देते हैं. देशभर में अब तक 50 से ज्यादा माडल फॉर्म बना चुके हैं. इन सबके अलावा आकाश अभी तक 42 हजार किसानों को प्रशिक्षित कर चुके हैं. जिसमें 33 हजार किसान और साढ़े सात हजार युवा हैं. यही वजह है कि आज देश के साढ़े छह हजार किसान और 250 युवा पूरी तरह से आकाश के बताये तौर तरीकों से 18 हजार एकड़ जमीन में खेती कर रहे हैं.

वहीं इन सबके बारे में आकाश की खुद राय मानें तो, वो कहते हैं कि मेरी पूरी कोशिश यही रहती है कि, ट्रेनिंग के अलावा किसानों को उन्हीं के अंदाज में खेती सिखाई जा सके. जिससे किसानों के लिए खेती ज्यादा उपयोगी हो सके. इसके अलावा आकाश कहते हैं कि, मैं हर दिन नये तरीके की खेती करने की कोशिश करता हूं, जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके.

अभी मुझको महज 7 साल खेती करते हुआ है. ये मेरे लिए खुशी की बात है. मैं अपनी खेती के साथ साथ किसानों की समस्याओं का भी समाधान कर पाता हूं. मै एक साथ एक ही जमीन पर चार से पांच फसलें लेता हूं जिससे लागत और समय दोनों की बचत होती है और अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि एक फसल से दूसरे फसल को खाद मिलती रहती है, फसलों में खरपतवार नहीं होता है, कीड़े नहीं लगते हैं।”

वहीं इन सबके अलावा आकाश का मानना है कि, “म्यूजिक सुनना भी काफी फायदेमंद साबित होता है क्योंकि म्यूजिक सुनाकर केंचुओं में उत्पादन की क्षमता विकसित होती है. जोकि 60 दिन की बजाय 45 दिन में ही खास तैयार कर देते हैं. वहीं अगर फसल की बात की जाए तो 90 दिन वाली फसल 70 से 75 दिन में तैयार हो जाती है. फसल की कटाई 15 से 20 दिन में होने के साथ ही उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी होती है. आकाश इसके अलावा बताते हैं कि, “म्यूजिक सुबह और शाम दो-दो घंटे सुनाना पर्याप्त हैं, रात में नहीं सुनाना चाहिए, क्लासिकल म्यूजिक हो जिसमें एक धुन हो, रिदम हो शब्द न हों, दोपहर में भी इसे सुनाया जा सकता है.”

इन सबके अलावा आकाश कीटनाशक भी बनाते हैं. घर पर ये रासायनिक खादों की पूर्ति जैविक चीजों को मिलाकर जैविक खाद तैयार करते हैं जिससे मिट्टी को भरपूर पोषक तत्व मिल सकें. किसानों की बाजार से निर्भरता कम हो इसके लिए किसान खाद से लेकर कीटनाशक तक सभी खादें घर पर ही बनाते हैं. इसके साथ आकाश भारत की विलुप्त प्रजातियों को संरक्षित करने का भी काम बाखूबी कर रहे हैं. ये देशी तरीके से ग्रीन हाउस तैयार करते हैं जिससे फसल प्राकृतिक आपदा से बच सके.

तो ये हैं आकाश चौरसिया सागर, जो महज 28 की उम्र में ही इतना काम और इतना तजुर्बा कर चुके हैं कि, किसानों की समस्याओं का निदान कर रहे हैं.

 

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