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वो किसान जिसने जैविक खेती को आधार बना, दुनिया में कमाया नाम-हुकुमचंद पाटीदार

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Hukum Chand (हुकुमचंद पाटीदार)

वो किसान जिसने जैविक खेती को आधार बना, दुनिया में कमाया नाम-हुकुमचंद पाटीदार

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जैसा की सब जानते हैं कि भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि हैं….और अधिक्तर ग्रामीणों की आय का मुख्य साधन कृषि हैं. इसके साथ दिनों दिन बढ़ती आबादी की अगर बात करें, तो बढ़ती आबादी भारत के लिए दंश बनती जा रही है. जिसके चलते बेरोजगारी और किसानों पर भार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में किसान अपनी फसलों को बढ़ाने के लिए दिनों दिन अपने खेतों में कीटनाशकों और रासायनिकों का प्रयोग ज्यादा करने लगा है. जिसके चलते खेत में एक समय तक उत्पादन बढ़ा. हालांकि आज वही रासायनिक पर्दाथ और कीटनाशक लोगों के लिए परेशानियां बन गये हैं. चाहे बात खेती की करें या फिर इंसानों की दोनों ही इनके अधिक प्रयोग से प्रभावित हुए हैं.

ऐसे में जैविक खेती एक कारगर उपाय है और यही वजह है कि, सरकार भी इस खेती को बढ़ावा देने की ओर अग्रसर है. जैविक खेती करने वाले देश के उच्च किसानों की अगर बात करें तो उनमें हुकुमचंद पाटीदार का नाम सबसे ऊपर आता है. जिसके चलते केंद्र सरकार ने हुकुमचंद पाटीदार को पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित किया है. Hukum Chand (हुकुमचंद पाटीदार) जैविक खेती के लिए जानें जाते हैं.

राजस्थान के  झालवाड़ के मनपुरा गांव के रहने वाले Hukum Chand (हुकुमचंद पाटीदार) को भले ही देश की जनता उतना नहीं पहचानती हो. लेकिन आज वे जैविक खेती के क्षेत्र में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं. खेती से लेकर पद्म भूषण हुकुमचंद पाटीदार तक का सफर कुछ यूं शुरू हुआ कि शुरुआत में पाटीदार ने  डेढ़ दशक पहले एक हेक्टेयर क्षेत्र से जैविक खेती की शुरुआत की, जिसमें उत्पादन कुछ खास मुनाफे का नहीं हुआ. लेकिन उसमें इसमें खास बात ये थी की, इस फसल में उन्होंने किसी भी तरह के कीटनाशक रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया. अगली बार उन्होंने बैंक से ऋण लेते हुए वर्मी-कंपोस्ट तैयार किया और अपनी फसलों पर इसका इस्तेमाल किया. जिसके चलते उनकी फसल अच्छी तो हुई ही और उससे  पीछे हुए नुकसान की भरपाई भी हो गई. इसके बाद उन्होंने 40 एकड़ भूमि पर जैविक खेती शुरू की. हालांकि उन्हें शुरुआत में कई दिक्क्तों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी  और अपनी फसलों पर वर्मी-कंपोस्ट का उपयोग करते रहे.

ये सब देख दूसरे किसानों में भी जागरूकता आई और उन्होंने भी जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया और जैविक खेती से लाभ उठाना शुरू किया….Hukum Chand (हुकुमचंद पाटीदार) ने जैविक खेती में आने वाली समस्याओं का हल ढूंढा और अपने खेत पर ही हरी खाद, गोबर खाद, जीवामृत, पंचगव्य रसायन सहित अन्य जैविक दवाइयां तैयार की……आज आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, जर्मनी,  फ्रांस और कोरिया तक उनके यहां से जैविक उत्पाद जा रहे हैं. जिनकी कीमत विदेशी बाज़ारों में अच्छी हैं. इतना ही नहीं देश के मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र सहित बाकि राज्यों में भी जैविक उत्पादों की काफी भारी मांग हैं और तो और 28  देशों के प्रतिनिधि पाटीदार के वहां आकर गौआधारित कृषि पर जानकारी प्राप्त कर चुके हैं. Farm to Kitchen.com  नाम की उन्होंने एक वेबसाइट भी शुरू की हुई है.

इसके अलावा अगर बात करें, तो सालान 15 हजार किसान हुकुमचंद पाटीदार के यहां जाकर गौआधारित कृषि पर प्रशिक्षण लेते हैं. इसके अलावा अगर बात करें तो, Hukum Chand (हुकुमचंद पाटीदार) को बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान अपने बहुचर्चित शो सत्यमेव जयते में भी बुला कर सम्मानित कर चुके हैं. जाहिर है खेती में मुनाफा अधिक है. हालांकि जब खेती को उस आधार से किया जाये जिसकी उसे जरूरत है. ऐसे में हुकुमचंद पाटीदार का पद्म श्री ऑवार्ड से सम्मानित होना किसानों के लिए गर्व की बात है.

 

 

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