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किडनी बेचने को आखिर क्यों मजबूर हुआ किसान रामकुमार

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किसान रामकुमार

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किसान को हमारे देश में अन्नदाता कहा जाता है यानी किसान को यहाँ पर भगवान के अवतार के रूप में देखा जाता है. लेकिन जब भगवान का अवतार कहे जाने वाले को परेशान किया जाता है तो उस पर क्या गुजरती है, यह थोड़ी सी समझने वाली बात है यानी की जिसको चोट लगती है दर्द का पता उसी को लगता है. किसानों के साथ ऐसा करने में हमारे देश का सरकारी तंत्र बहुत आगे है. एक तो किसान की किसी बात को सरकारी विभाग में जरा भी नहीं सुना जाता है, साथ ही उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. यहाँ तक कि मदद करना तो दूर की बात है उनको सही से यह भी नहीं बताया जाता कि उसको लोन लेने अथवा क्रेडिट कार्ड आवेदन करने के लिए क्या करना पड़ेगा कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के सहरानपुर का जहा पर सरकारी तंत्र से परेशान होकर एक किसान अपनी किडनी बेचने को तैयार हो गया.

यह मामला सहारनपुर के शहजानपुर क्षेत्र का है तहसील नकुड़ के रहने वाले किसान रामकुमार के पास थोड़ी जमीन है जिसमें वो मौसम के हिसाब से खेती करते हैं. लेकिन उस खेती में परिवार को चलाना मुश्किल है. रामकुमार ने बताया कि इस खेती से उन्हें बहुत काम आय होती है जिससे की उनका ६ सदस्यों का परिवार चलाना  मुश्किल हो जाता है. इसलिए रामकुमार ने खेती के साथ कुछ व्यवसाय शुरू करने की सोची क्योंकि रामकुमार ने साल २००७  में अम्बाला से पशुपालन में प्रशिक्षण हासिल किया था उसके बाद उन्होंने २०१६ में भी डेरी फार्मिंग में भी प्रशिक्षण हासिल किया था.

तभी से वो डेरी फार्मिंग शुरू करने के लिए प्रयास कर रहे थे. डेरी फार्मिंग शुरू करने से पहले उनके सामने सबसे बड़ी समस्या वित्तीय सहायता की थी क्योंकि इसको शुरू करने के लिए अधिक पैसों की जरुरत थी. रामकुमार कृषि विज्ञान केंद्र सहरानपुर के कृषि विषेशज्ञों के संपर्क में थे उन्होंने उनसे सलाह ली तो कृषि विशेषज्ञ ने रामकुमार को बताया की यदि वो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण हासिल कर ले तो उनको अपना व्यवसाय  शुरू करने के लिए बैंक से आसानी से लोन प्राप्त हो जाएगा. वर्ष २०१८ में रामकुमार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण लिया और वहां से प्राप्त प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने लोन के लिए बैंको से संपर्क साधना शुरू किया.

रामकुमार पशुओं के लिए शेड पहले से ही तैयार कर चुके थे जिसमें कुछ पशु पहले से ही थे यह सब रामकुमार ने इसलिए किया ताकि उनको लोन आसानी से मिल सके. जिस बैंक के पास भी राम कुमार लोन के लिए गए उन सबने इस किसान को यह कहकर टरका दिया कि जिस बैंक से रामकुमार का क्रेडिट कार्ड बना हुआ है. वही बैंक लोन देगा. आख़िरकार रामकुमार उसी बैंक के पास पहुंचे जहा से उनका केडिट कार्ड बना था, यूनियन बैंक वहां पर जाकर उन्होने बैंक मैनेजर से लोन के लिए बात की और सरकार द्वारा दिए सभी प्रमाण पत्रों का हवाला दिया लेकिन बैंक मैनेजर लोन देने से मना कर दिया और उनको वह से डांटकर भगा दिया.

एक ब्रांच के बैंक मैनेजर ने तो यहाँ तक कह दिया की सरकार द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के ये सभी प्रमाण पत्र नकली हैं और इनको तुमने पैसे देकर बनवाया है. सभी बैंको से हताश होकर रामकुमार ने इसकी शिकायत डीएम, एसडीएम, मुख्यमंत्री ऑफिस तक की लेकिन वहां से उनको कोई जवाब न मिला. अंत में उन्होंने इसकी शिकायत डिस्ट्रिक्ट लीड मैनेजर से की उसके बाद दोबारा से वो यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के ब्रांच मैनेजर के पास गए तो उसने बात करने से मन कर दिया.

रामकुमार ने बताया की सभी जगह से हताश होकर उन्होंने  आत्महत्या करने की सोची क्योंकि जो पैसा उन्होंने कर्ज लेकर शेड बनाने में लगाया था उसको वापस लेने के लिए साहूकार रामकुमार पर दबाव बना रहे थे. लेकिन परिवार वालों के समझने बुझाने के बाद उन्होंने आत्महत्या है कि लेकिन ऐसा कदम उठाने को मजबूर हो गए जो आत्महत्या करने से कही ज्यादा बुरा है.

किसान रामकुमार ने अपनी किडनी बेचने का फैसला किया ताकि उनको इतना पैसा मिल सके जिससे कि वो अपना कर्जा चुका सके. इसके लिए उन्होंने जगह-जगह पोस्टर लगा दिए और इस पोस्टर को सोशल मीडिया पर भी दाल दिया. रामकुमार बताते हैं कि इस पोस्टर के वायरल होने के बाद उनको दुबई से किडनी खरीदने के लिए काल आया. लेकिन सोचने वाली बात यह है कि सरकारी तंत्र के सामने एक किसान के साथ यह सब हुआ.

जो की शर्मशार कर देने वाला है. एक और तो सरकारी तंत्र किसानों की आय को दोगुनी करने और किसानों की आत्महत्या रोकने की बात करता है  लेकिन वही दूसरी ओर एक किसान इसी सरकारी तंत्र के सामने मजबूर होकर आत्महत्या करने ओर अपने शरीर के अंगो को बेचने को तैयार हो जाता है. न जाने इस तरह से ओर कितने रामकुमार जैसे किसान मजबूर होंगे . जो इस तरह से मजबूर और लाचार होकर ऐसे कदम उठाते हैं

सरकार द्वारा दिए गए प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी बताए गए नकली :  किसान रामकुमार जब सरकार द्वारा दिए गए प्रशिक्षण प्रमाण पत्र लेकर बैंक में पहुंचे तो बैंक ऑफ़ बड़ौदा की  ब्रांच मैनेजर ने यह कहकर रामकुमार को चलता कर दिया ऐसे प्रमाण-पत्रों पर लोन नहीं दिया जाता  यह सब तुमने पैसे देकर बनवाये है . इसका मतलब यही होता है कि सरकार द्वारा दिए गए प्रशिक्षण प्रमाण पत्र किसी काम के नहीं है.

इस खबर को किसान बुलेटिन में देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

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