कर्ज, बदहाली और आत्महत्या : एक ही दिन में तीन किसानों ने लगाया मौत को गले

देश में किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें अब आम हो चली हैं। आलम ये है कि रोज आत्महत्या की खबरें सुन सुन कर अब तो ना लोगों को और ना सरकार को कोई फर्क़ पड़ता है। कर्ज के बोझ तले किसान एक के बाद एक आत्महत्या करते जा रहे हैं। एक बार फिर से मध्य प्रदेश में भारी कर्ज और फसल बर्बादी की वजह से एक किसान ने कीटनाशक पदार्थ पीकर खुदकुशी कर ली है। किसान को गंभीर हालत में पिपरिया के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई। पिपरिया थाने के गड़ाघाट के रहने वाले किसान ब्रजमोहन पटेल ने मौत को गले लगा लिया है। ब्रजमोहन पर बैंक का लगभग चार लाख कर्ज था और फसल भी अच्छी नहीं हुई थी, जिसके चलते उसने खुदकुशी कर ली। किसान के परिजनों का कहना है कि उन पर 5-6 लाख रुपए का कर्ज था। फसल की सही कीमत नहीं मिल पाने की वजह से कुछ दिन से तनाव में थे। किसान ने मूंग की फसल बोई थी, लेकिन उसका भुगतान नहीं हो पाया था। उसने कर्ज के लिए पत्नी के सोने के गहने भी बैंक में रख दिए थे।

देश में किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें अब आम हो चली हैं। आलम ये है कि रोज आत्महत्या की खबरें सुन सुन कर अब तो ना लोगों को और ना सरकार को कोई फर्क़ पड़ता है। कर्ज के बोझ तले किसान एक के बाद एक आत्महत्या करते जा रहे हैं।

एक बार फिर से मध्य प्रदेश में भारी कर्ज और फसल बर्बादी की वजह से एक किसान ने कीटनाशक पदार्थ पीकर खुदकुशी कर ली है। किसान को गंभीर हालत में पिपरिया के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई। पिपरिया थाने के गड़ाघाट के रहने वाले किसान ब्रजमोहन पटेल ने मौत को गले लगा लिया है।

ब्रजमोहन पर बैंक का लगभग चार लाख कर्ज था और फसल भी अच्छी नहीं हुई थी, जिसके चलते उसने खुदकुशी कर ली। किसान के परिजनों का कहना है कि उन पर 5-6 लाख रुपए का कर्ज था। फसल की सही कीमत नहीं मिल पाने की वजह से कुछ दिन से तनाव में थे। किसान ने मूंग की फसल बोई थी, लेकिन उसका भुगतान नहीं हो पाया था। उसने कर्ज के लिए पत्नी के सोने के गहने भी बैंक में रख दिए थे।

बदहाली की मार झेल रहा बुंदेलखंड का एक और किसान इस दुनिया में नहीं रहा। नोटा गांव के एक किसान ने कमरे में पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान क्रेडिट कार्ड का एक लाख रुपये का कर्ज था। सबसे बड़ी बात ये कि उसके उसके पिता के नाम भी आठ लाख रुपये का कर्ज है। दरअसल पिछले साल बारिश न होने की वजह से खरीफ फसल नहीं हो सकी। रबी फसल भी ठीक नहीं हुई। ऐसे में पूरे परिवार के पालन पोषण के लिए किसान को कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ा। पिछले काफ़ी समय से वो गुमसुम रहने लगा था। कुछ दिन से न तो ठीक से खा रहा था, न ही सो रहा था। घर के लोगों से भी बातचीत करना बंद कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के महोबा में भी किसान ने आत्महत्या कर ली। जिसकी कहानी सुनकर आपका दिल पसीज जाएगा। दरअसल किसान वरदानी ने इलाहबाद बैंक से 75 हज़ार का लोन इस उम्मीद में लिया था कि वो जल्द ही बैंक का कर्ज चुका देगा मगर वरदानी की फसल बर्बाद हो गई। परिवार का पेट पालने और बेटे की शादी करने के लिए भी किसान के पास पैसे नहीं थे। जिसके बाद किसान ने साहूकारों से पैसे उधार लिए मगर बेटे की शादी में पैसों की तंगी के चलते वरदानी की मेहमानों ने काफी बेज्जती की। इस बात से वरदानी काफ़ी आहात था। उधार लिया सारा पैसा खर्च हो चुका था। फसल बर्बाद हो चुकी थी ऐसे में वरदानी को अब दोबारा कोई भी पैसा उधार नहीं देता। इतनी चिंताओं से मुक्त होने के लिए किसान ने अपने खेत में आत्महत्या कर ली।

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