विनोद कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़ की मोती की खेती, कमा रहे हैं लाखों रूपए

विनोद कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़ की मोती की खेती

विनोद कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़ की मोती की खेती, कमा रहे हैं लाखों रूपए  कृषि की ओर अब युवाओं का रुझान धीरे – धीरे बढ़ने लगा हैं। जो आज अपनी हजारों रूपये की नौकरी छोड़ कर कृषि क्षेत्र में अपनी मेहनत का लौहा मनवा रहें हैं। इसका जीता जागता उदाहरण गुरूग्राम के जमालपुर के विनोद कुमार हैं। फरुखनगर के पास जमालपुर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय  विनोद कुमार इंजीनीयरींग की नौकरी छोड़ आज मोती की खेती कर हर साल लाखों रुपयें कमा रहें हैं।विनोद कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़ की मोती की खेती

विनोद कुमार की माने तो एक बार वे अपने चाचा के साथ मतस्य विभाग के दफ्तर गए थे , जंहा उन्होने एक पोस्टर पर मोती पैदा करने का तरीका देखा था बस तभी से उनके अन्दर मोती की खेती की दिलचस्पी बढ़ी और मत्स्य कार्यालय में कुछ नया करने के लिए विनोद ने जिला मत्स्य अधिकारी से बातचीत की और मोती की खेती का प्रशिक्षण लेने के लिए मई 2016 में भुवनेश्वर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर (सीफा) चले गए।

जहां एक सप्ताह के प्रशिक्षण लेने के बाद  घर के पास बनें 200 वर्ग फुट का गड्ढे में  मछली पालन की शुरुवात की जोकि काफी मुश्किल था मगर विनोद ने मछुआरों से सीप खरीद कर उस गड्ढे में डाल दिये और देखते ही देखते 10 से 12 महीने में ही सीप से मोती तैयार हो गये। जिसके लिए उनका केवल60 हजार रुपये का खर्च आया और आज वे इस सीप से सालाना 4 से 5 लाख रुपये कमा रहें हैं। अगर इन मोतियों की कीमत की बात करे तो एक मोती 300 से 1500 तक का बिकता हैं। जिसकी सूरत, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता के बाजारों में भारी मांग हैं।

हांलाकि शुरुवाती दिनों में विनोद की मोती की खेती का आस –पास के गांव वालो ने खुब मज़ाक बनाया। मगर आज वंही लोग  मोती की खेती करने के लिए दूर –दूर  से विनोद से प्रशिक्षण लेने आते हैं।जिनको देख आज हरियाणा के छह जिलों के 20 से अधिक किसान मोती की खेती कर रहे हैं।

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