देश में किसानों की परेशानियों को लेकर, अन्ना हजारे Anna Hazare का आमरण अनशन, रखी पांच मांगे

Anna Hazare का आमरण अनशन

बात अगर बीते 30 जनवरी की करें तो, जहां एक तरफ पूरा देश, देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथी मना रहा था. वहीं दूसरी तरफ देश के विभिन्न स्थानों पर अनशन शुरू हुआ है. आखिर अनशन किस बात का और कौन करने वालों में कौन कौन है…तो हम आपको बता दें कि, देश के विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय किसान महासंघ ने देश के किसानों की परेशानियों को लेकर देश के विभिन्न स्थानों पर आमरण अनशन की शुरूवात की है.

अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में जहां ये अनशन 30 जनवरी 2019 को शुरू किया गया,वहीं अन्ना हजारे Anna Hazare ने रालेगण सिद्धि में अपने अनशन की शुरुवात की.

अन्ना हजारे के साथ राष्ट्रीय किसान महासंघ की कोर कमेटी के सदस्य शिवकुमार कक्का जी भी इस अनशन के मंच पर मौजूद रहे. वहीं अगर बात गुजरात किसान संगठन की करें तो, जे के पटेल और लक्ष्मण जी वांगे ने गुजरात में इस अनशन की शुरुवात की. तो वहीं चड़ीगढ में हजारों किसान जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में होने वाले आमरण अनशन में शामिल हुए. देश के अन्य राज्यों दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और देश के अन्य राज्यों के किसानों ने इसमें समर्थन देने की बात कही. इसके अलावा उड़ीसा के किसानों ने धरना प्रदर्शन किया और किसान एकता संकल्प लिया.

आखिर इस आंदोलन की मांगे क्या हैं…

राष्ट्रीय किसान महासंघ और अन्ना हजारे Anna Hazare के नेतृत्व में होने वाले इस आंदोलन की प्रमुख मांगे….

पहली मांग-

केंद्र में लोकपाल बिल तो पास हो गया, राज्य में भी पास हो गया हालांकि इसकी अभी तक नियुक्तियां नहीं की गई हैं…जिसके चलते राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्तियां की जाए

दूसरी मांग-

किसानों को स्वामीनाथन आयोग के अनुसार उनकी फसल की लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य के हिसाब से भुगतान किया जाए…इन सबके साथ किसानों की सभी फसलों को खरीदने की गारंटी का प्रावधान बनाया जाए..

तीसरी मांग-

देश के सभी किसानों को पूर्ण कर्जमुक्त किया जाए….

चौथी मांग-

मौसमी सब्जी, फल व दूध का भी MSP तय किया जाए..

पांचवी मांग-

देश के सभी किसानों की एक न्यूनतम आय सुनिश्चित की जाए, जिससे किसानों को बेसिक वेतन मिल सके…

जहां एक तरफ अगर बात करें देश के किसानों की तो, बहुत सी ऐसी जगहें हैं जिनके चलते किसानों को हर बार मुसीबत की मार झेलने पड़ती है. कभी किसानों को तय किये गये दाम नहीं मिलते तो कभी किसानों की फसल लेने के लिए सरकार के पास तैयारी अधूरी रह जाती है. इस लिहाज से किसानों की मांगे पूर्णतय: जायज है. हालांकि अगर बात देश के किसानों की पूर्ण रुप से कर्जमुक्त की करें तो, कहीं न कहीं पूर्ण रूप से कर्ज मुक्ति में देश की आर्थिक तरक्की पर भी अकुंश लग सकता है. ऐसे में अब ये देखने वाली बात होगी की कब सरकार जागेगी और कब इस अनशन की मांगे असल धरातल पर निकल कर बाहर आ पायेगी...

 

 

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