डीकम्पोज़र का इस्तेमाल कर रासायनिक कीटनाशकों के खर्चे से बच सकते हैं किसान

डीकम्पोज़र का इस्तेमाल

डीकम्पोज़र का इस्तेमाल कर रासायनिक कीटनाशकों के खर्चे से बच सकते हैं किसान रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से जहां एक तरफ प्रदूषण फैल रहा हैं वहीं मिट्टी का उपजाऊपन भी धीरे – धीरे खत्म होता जा रहा हैं जो कि प्रक्रति के साथ – साथ इंसानो के लिए भी घातक साबित हो रहा हैं। जिसको लेकर जैविक खेती करने के लिए कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है और अगर हम यूं कहें कि अब केवल 20 रुपये में आप जैविक खेती कर लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं तो शायद आप एक पल के लिए हमारी बात पर यकीन ना करें… मगर ये बात एक दम सच हैं….

दरअसल राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद ने एक डीकंपोजर को तैयार किया हैं जो मात्र 20 रूपये का हैं जिसकी मदद से किसान हजारो के रासायनिक कीटनाशकों के खर्चे को बचा सकते हैं। दरअसल इस वेस्ट डीकंपोजर को गाय के गोबर और पत्तियों के जीवाणु से तैयार किया गया है। जो मिट्टी में जैविक परिवर्तन और केचुएं पैदा करता हैं। जिसके ज़रिए किसान जैविक खेती करके आज लाखों रुपए कमा रहे हैं। इसको इस्तेमाल करना भी आसान हैं डिकंपोजर के इस सल्यूशन को 200 लीटर पानी में दो किलो गुड़ घोलकर मिला दिया जाता है और फिर चार दिन बाद उस घोल का खेतों में छिड़काव कर दिया जाता है जिसके बाद 40 दिन में कम्पोस्ट खाद तैयार हो जाएगा। इसके अलावा फसलों की बीमारी को दूर करने के लिए भी हर एक महीने में इसका छिड़काव कर सकते हैं।

इस जैविक खाद का इस्तेमाल आज सैकड़ों किसान कर रहे हैं और इसके परिणाम भी बेहतर बताए हैं साथ ही उनकी फसलों का उत्पादन भी बढ रहा हैं। तो वहीं इसका अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। इतना ही नही इससे किसानों की पराली जलाने कि समस्या का समाधान भी हो रहा हैं, जिससे किसान अब पराली जलाने की बजाय, उसे जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं।

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