छत्तीसगढ़ काले गेंहू से सोना उगल रहे हैं दुर्ग जिले के किसान गेहूं दुनिया में सबसे ज़्यादा खाया जाने वाला वो अनाज हैं जिसके बिना इंसान का पेट नहीं भरता और अगर बात भारत की करें तो चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर गेंहू का उत्पादन करने वाला देश है।
छत्तीसगढ़ काले गेंहू से सोना उगल रहे हैं दुर्ग जिले के किसान गेहूं दुनिया में सबसे ज़्यादा खाया जाने वाला वो अनाज हैं जिसके बिना इंसान का पेट नहीं भरता और अगर बात भारत की करें तो चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर गेंहू का उत्पादन करने वाला देश है। अगर गेंहू की वैराइटी की बात करे तो गेंहू की केवल एक किस्म नहीं होती बल्कि इसकी कई किस्में  होती हैं। जिसमें से एक काला गेंहू भी हैं। हममें से ज़्यादातर लोग केवल पीला गेंहू ही खाते हैं। लकिन क्या आपने काले गेहू के बारे मे सुना हैं? और अगर सुना भी हैं तो इसके बारे में शायद आपको इतनी जानकारी भी नहीं होगी। दरअसल हम आज काले गेंहू का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योकि छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के किसानो का रुझान इन दिनों काले गेंहू की तरफ हो रहा हैं। वो इसलिए क्योकि इसकी डिमांड अब बाजारों में ज्यादा होने लगी हैं।

आज जोबा के प्रणय कुमार और राजू  इसकी खेती कर रहे हैं। तो वंही अचानकपुर के किसान रोहित चंद्राकर भी इसकी खेती कर रहे हैं। रोहित की माने तो ये गेहूं शुगर फ्री होता है। इसलिये  किसानों का रूझान इसकी ओर  बढ़ रहा है। बाजार में  इस बीज की कीमत सौ रुपये प्रति किलो हैं। जिसकी आपूर्ति पंजाब  व हरियाणा से होती है।

बता दें कि काले गेहूं के बीज को तैयार करने में जामुन व ब्‍लू बेरी फल का इस्‍तेमाल किया जाता हैं। इसी कारण इसका रंग काला हैं। इसके कारण इसमें न केवल मधुमेह से लडऩे की शक्ति होती हैं। बल्कि  इस प्रकार के गेहूं में कैंसर से भी लडऩे की क्षमता होती हैं। इसकी खेती से उपज भी अधिक मिलती जिससे किसानों को  प्रति एकड़ करीब 15 से 18 क्विंटल उपज मिल जाती हैं। काले गेहू में कार्बोहायड्रेट , विटामिन, जिंक, पोटाश, आयरन व फाइबर आदि तत्व पारंपरिक गेहूं के मुकाबले दोगुनी मात्रा में पाए जाते  हैं। इस गेहूं की रोटी खाने से शरीर का मोटापा तो कम होता हैं ही साथ ही  एसिडिटी से भी छुटकारा मिलता हैं। हालांकि ये  गेहूं पकने में भी साधारण गेहूं जितना ही समय लेता हैं। लेकिन अगर इसकी बिजाई अगेती की जाए और पकने के समय 30-35 डिग्री के बीच तापमान हो, तो इसकी गुणवत्ता और रंग भी अच्छे बनते हैं। इसका रंग देखने में बेशक काला हो , लेकिन इसकी रोटी ब्राऊन ही बनती हैं।
बताया जा रहा हैं कि किसानों में इसके प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए किसानों को प्रेरित भी किया जा रहा हैं। साथ ही कृषि विभाग भी इसके प्रति किसानों को जागरूक कर रहा हैं। वहीं कृषि विभाग इससे सम्बन्धित योजना बनाने में काम कर रहा हैं और अगर कृषि विभाग इस योजना में सफल हो जाता हैं तो बहुत जल्द ही छत्तीसगढ़ में इस काले गेहूं की फसल ज़्यादा मात्रा में लहलहाती नज़र आएगी।

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