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किसानों के लिए बचत और आय का बेहतर साधन है यह ग्रेडर संयंत्र

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भारत सरकार पिछले कुछ समय से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है इसके लिए किसानो के लिए अलग-अलग योजनाए भी चलायी जा रही हैं जिसके तहत किसानों को इन योजनाओ से जोड़ा जा रहा है. किसानों की आय को बढ़ाने में कृषि यंत्रो का बहुत बड़ा योगदान है. इनके उपयोग से किसानों की आय भी बढ़ती है और समय की बचत भी होती है. भाकृअनुप-सीआइएई भोपाल भी इसमें अहम भूमिका निभा रहा है. इस संस्था ने एक ग्रेडिंग संयंत्र तैयार किया है और इस ग्रेडिंग संयंत्र को किसानों द्वारा स्थापित करा रहा है. इस संयंत्र का इस्तेमाल प्याज, निम्बू, अमरुद व अन्य फसलों की ग्रेडिंग में इस्तेमाल किया जाता है.भाकृअनुप-सीआइएई द्वारा तैयार इस संयंत्र  के को फल-सह-सब्जी में इस्तेमाल करके श्रेणी-निर्धारक (ग्रेडर) से किसानों की आय को दोगुना करने का मार्ग प्रशस्त किया है. जो किसान अपने यहाँ फलों और प्याज का उत्पादन बड़े पैमाने पर करते हैं उनके लिए फलों और सब्जियों की श्रेणीकरण (ग्रेडिंग) को उत्पादकों के बीच सबसे महत्त्वपूर्ण कार्यों में से एक माना जाता है क्योंकि यह उत्पादों में मूल्य वृद्धि करता है और अधिक आर्थिक लाभ प्रदान करता है। जबकि, मैन्युअल ग्रेडिंग महंगी और अधिक समय लेने वाली प्रक्रिया है। आज के समय में मजदूर का मिलना वैसे भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस संयत्र के माध्यम से ग्रेडिंग के काम को जल्दी और काम लागत में निपटाया जा सकता है।

ग्रेडर संयंत्र

भाकृअनुप-सीआइएई भोपाल संस्थान ने जिले के किसान  मदन मोहन पाटीदार को यह ग्रेडर संयंत्र स्थापित करने में मदद की. मदन मोहन पाटीदार अपनी 15 एकड़ जमीन से 250 टन प्याज का उत्पादन करते हैं। इस प्याज उत्पादन की ग्रेडिंग वो मजदूरों से करवाते थे जिसमें समय भी बहुत अधिक लगता था और लागत भी अधिक आती थी पाटीदार बताते है कि यदि कोई व्यक्ति प्रति दिन 500 किलो प्याज का ग्रेडिंग हाथ से (मैन्युअली) करता है तो 2 लाख रुपए (400रुपए/मजदूर) की कुल श्रम लागत पर 250 टन प्याज की ग्रेडिंग के लिए 500 मजदूर/दिन की आवश्यकता होगी. इसी लागत को काम करने के लिए संस्थान ने पाटीदार को यह ग्रेडिंग संयंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया.

भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल ने प्याज, मीठा नींबू और अमरूद की ग्रेडिंग के लिए पाटीदार को मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत विकसित किए गए अपने फल-सह-सब्जी श्रेणी-निर्धारक (ग्रेडर) को इस किसान के यहाँ स्थापित किया। अब पाटीदार ने 250 टन प्याज की ग्रेडिंग इस ग्रेडर से ही करना शुरू कर दिया है.  इस ग्रेडर की क्षमता 2 टन/घंटा है। अर्थात प्रति दिन 8 घंटे के संचालन के फलस्वरूप 16 दिनों में ग्रेडर 250 टन प्याज के आसपास ग्रेड कर सकता है।

ग्रेडर संयंत्र

इसके अलावा यह कुशल ग्रेडिंग के साथ-साथ समय, श्रम और लागत को बचाने में मदद कर सकता है। ग्रेडर संयंत्र का उपयोग करने पर इसके संचालन की लागत 300 रुपए/टन है। इस प्रकार 250 टन प्याज की ग्रेडिंग के लिए कुल 75,000 रुपए की लागत होती है। इस ग्रेडर कि सहायता से पाटीदार ने 1,25,000 रूपए (63%) की बचत बचत की। ग्रेडिंग कि करने के बाद उत्पाद का बजार में अच्छा मूल्य मिल जाता है। बिना ग्रेडिंग के प्याज की कीमत 400 रुपए/क्विंटल है, जबकि ग्रेडिंग के फलस्वरूप प्याज की कीमत 700 रुपए/क्विंटल है।

किसान पाटीदार ने 250 टन ग्रेडेड प्याज से 7,50,000 रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त किया है, जिससे वह काफी खुश है। भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा विकसित फल-सह-सब्जी श्रेणी-निर्धारक (ग्रेडर) का उपयोग करके कुशल ग्रेडिंग के साथ समय और श्रम की बचत और अच्छी आय प्राप्त कि जा सकती है । इस संयंत्र के विषय में और अधिक जानकारी के लिए भाकृअनुप-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के न. 0755 2521242 पर संपर्क कर सकते हैं।

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