एक दिव्यांग ने किया ऐसा आविष्कार, जिसको देखकर सरकार ने उनके हौसले को किया सलाम

दिव्यांग

दिव्यांग लोगो की बात करें तो कुछ दिव्यांग लोग अपनी जिंदगी में हमेंशा निराश रहते हैं भगवान को कोसते रहतें हैं, और जिंदगी जीने की आस छोड़ देते हैं। लेकिन कुछ दिव्यांग लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने बल पर कामयाबी पा लेते हैं। हम भी आपको एक ऐसे दिव्यांग व्यक्ति के बारे में बताने जा रहें हैं जो अपने राज्य के लिए मिसाल बन गए हैं।

ये दिव्यांग व्यक्ति राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले रवींद्र पांडेय हैं रवींद्र पांडेय के साथ कुदरत ने ही नाइंसाफी कर दी और बचपन में ही वे दिव्यांग हो गए। क्योंकि उन्हें बचपन में ही लकवा हो गया था लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और कुछ ऐसा कर दिखाया कि अब सभी लोग उनके हौसले को सलाम करते हैं।

दरअसल दिव्यांग व्यक्ति आम इंसानों की तरह सभी कामों को करने में सक्षम नहीं होते हैं लेकिन रवींद्र पांडेय कुछ ऐसा कर दिखाया है कि अब दिव्यांग व्यक्ति भी आसानी से कार चला सकेंगे। उन्होंने एक कार को इस तरह से डिजायन किया है। जिसे कोई भी दिव्यांग आसानी से चला सकेगा। रवींद्र ने अपने द्वारा किए गए इस शानदारा अविष्कार को पेटेंट भी करा लिया है।

रवींद्र के अविष्कार की वजह से उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। बताते चलें कि यह इसलिए संभव हो सका है क्योंकि रवींद्र को टेक्नोलॉजी और साइंस से काफी प्यार था। उन्होंने साइंस और तकनीकी में रुचि के कारण ही आईटीआई में ड्राफ्ट्समेन के ट्रेड का डिप्लोमा भी किया था। इसके बाद उन्होंने खुद के चलने के लिए एक कार भी खरीदी। हालांकि दिव्यांग होने की वजह से उन्हें कार चलाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

इसके बाद शुरू हुआ रवींद्र की मेहनत का सिलसिला और उन्होंने कड़ी मेहनत कर एक ऐसी मशीन बनाई, जिसके बाद कार चलाना उनके लिए खेल समान हो गया। उन्होंने एक ऐसी डिवाइस बनाई जो कार के मैकेनिज्म के साथ फिट हो सकती थी। जिसके बाद अब रवींद्र बिना किसी फिक्र के कितनी भी लंबी ड्राइव कर सकते हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। हालांकि उन्होंने आर्थिक बोझ से मुक्ति के लिए दिव्यांगों के विशेष वाहनों को टोल प्लाजा पर छूट के लिए प्रयास किया। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पत्र भी लिखे।

रवींद्र की ही कड़ी मेहनत का नतीजा था कि सरकार ने भी उनके हौसले को सलाम किया और एक ऐसा फैसला लिया, जिसने दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। बताते चलें कि बीती जून 2016 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक अधिसूचना जारी कर दिव्यांगों के लिए बने वाहनों को टोल मुफ्त कर दिया। क्या कोई अभी भी रवींद्र को दिव्यांग कह सकता हैं

 

Grameen News के खबरों को Video रूप मे देखने के लिए ग्रामीण न्यूज़ के YouTube Channel को Subscribe करना ना भूले  https://www.youtube.com/channel/UCPoP0VzRh0g50ZqDMGqv7OQ

 

Kisan और खेती से जुड़ी हर खबर देखने के लिए Green TV India को Subscribe करना ना भूले https://www.youtube.com/user/Greentvindia1

 

Green TV India की Website Visit करें  http://www.greentvindia.com/

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password