एक ऐसा पिछड़ा गांव जहां पिता को नहीं पहचानते बच्चे, वजह हैरान कर देगी !

एक ऐसा पिछड़ा गांव जहां पिता को नहीं पहचानते बच्चे, वजह हैरान कर देगी !

एक ऐसा पिछड़ा गांव जहां पिता को नहीं पहचानते बच्चे, वजह हैरान कर देगी ! मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक ऐसा पिछड़ा गांव हैं जहां बच्चे पिता को पहचानते ही नहीं हैं। बेचारे बच्चे पहचानेंगे भी कैसे जब पिता उनके जन्म के तुरंत बाद ही पैसा कमाने के लिए शहर जो चले जाते हैं। अब शहर क्यों जाते हैं तो इसका जवाब ये है कि कौन अपनी बीवी बच्चों को छोड़कर शहर जाना चाहता होगा। मगर क्या करें ना गांव में खेती बाड़ी का कोई फायदा है और ना ही कोई रोज़गार ऐसे में लोग शहर ना जाएं तो क्या करें। इसलिए इस गांव के पिता अपने दुधमुहे बच्चों को छोड़कर शहर चले जाते हैं। इसलिए इस मनकी गांव को ‘मिसिंग फादर्स’ भी कहा जाता है। गांव के इस नाम के पीछे का कारण भी बहुत बड़ा है। गांव के हालात ऐसे हैं कि बच्चे अपने पिता से दूर रहने पर मजबूर हैं।

इस गांव के करीब 70 फीसदी पुरुष गांव से बाहर रहते हैं। बड़े बड़े शहरों में अपनी ज़िंदगी गांव में छोड़ बेहतर विकल्प की तलाश में निकल पड़ते हैं यहां के लोग। अब अगर कोई ये सोचे कि यहां रहकर लोग खेती क्यों नहीं करते तो इसका जवाब ये है कि इस गांव में सूखा पड़ रहा है। क्योंकि यहां काफ़ी समय से बारिश नहीं हुई है। बस इसलिए पानी की कमी की वजह से खेती करना यहां बड़ी टेढ़ी खीर है। मतलब जब खेतीबाड़ी नहीं है गांव में रोजगार भी नहीं है तो महिलाएं भी इस गांव में रहकर क्या करें इसलिए अब काम की तलाश में महिलाएं भी शहरों की तरफ रुख करने लगीं हैं। मगर शहरों में पूरे परिवार के साथ रहना मुश्किल है इसलिए लोग अपने बच्चों को यही छोड़ जाते हैं और कई महीनों या साल तक लौट कर नहीं आ पाते हैं। यही वजह है कि बच्चे ना अपने पिता के साथ रह पाते हैं और ना ही अपने पिता के साथ खेल कूद पाते हैं और मेला जा पाते हैं। कई साल बाद जब पिता लौटते हैं तो बच्चों और पिता के बीच वो सम्बन्ध कायम ही नहीं हो पाता जो होना चाहिए।

इस गांव में ना खेती बाड़ी की सुविधा है ना रोजगार है ना बिजली सड़क पानी और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाएं हैं। ग्रामीण इलाकों में विस्थापन का आंकड़ा देखा जाए तो कुछ 50,00,000 रहा है। इस गांव की महिलाओं का कहना है कि रोजी रोटी कमाने के लिए स्थानान्तरण ही एकमात्र रास्ता है। मतलब ये कि इस गांव की स्तिथि ना सुधरेगी और ना ही ये विस्थापन रुकेगा।

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