एक ऐसा गांव जहां गंदे पानी से हर दूसरा व्यक्ति है दिव्यांग

एक ऐसा गांव जहां गंदे पानी से हर दूसरा व्यक्ति है दिव्यांग

एक ऐसा गांव जहां गंदे पानी से हर दूसरा व्यक्ति है विकलांग शहरों में हो रही पानी की किल्लत पर तो सबकी नज़र है मगर गांव में होने वाली पानी की किल्लत और ख़राब पानी की सप्लाई पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता। अभी शिमला में हुई पानी की किल्लत पर पूरे देश की नज़र गई मगर देश में कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं होता और अगर होता भी है तो वो पीने योग्य ही नहीं होता। ऐसा ही एक गांव है उन्नाव में, जहां मकूर गांव में गंदा पानी पीने से लगभग हर घर में एक व्यक्ति विकलांग हो रहा है। एक तो गंदा पानी पीने से लोग विकलांग हो रहे हैं ऊपर से इन विकलांग लोगों को प्रशासन की तरफ़ से ना तो कोई सुविधाएं दी जा रही हैं और ना ही इन्हे इनके अधिकार मिल रहे हैं। ऐसे में इस गांव में आने वाली पीढ़ी पर भी ख़तरा मंडरा रहा है। लोग अब शादी के नाम से भी खौफ़ खा रहे हैं कि अगर वो शादी कर के अपना परिवार आगे बढ़ाते हैं तो उनके बच्चों पर भी कहीं गंदे पानी का अभिशाप ना लग जाए। यहां के डीएम या फिर प्रशासन ने भी कभी इस बात की सुध नहीं ली कि इस गांव में पानी की वजह से लोग विकलांग हो रहे हैं। गांव में फ्लोराइडयुक्त जहरीला पानी इस कदर लोगों के लिए मौत बन अब तक कई लोगों की समय से पहले मौत हो चुकी है, और जो बचे भी हैं वो भी चलने-फिरने में लाचार हैं।

हैरानी की है कि प्रशासन ने साफ़ पानी लोगों तक पहुंचाने के बारे में सोचा तक नहीं, ना ही गांव में हो रही इस परेशानी के बारे में कोई सुध ली। कई बार इस गांव की समस्या को लेकर ग्रामीण जिला प्रशासन को पत्र लिख चुके है। मगर किसी ने आकर इस गांव में होने वाली समाया पर ध्यान नहीं दिया। दिव्यांग होने के पीछे सबसे बड़ी वजह पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाया जाना है। मगर जब इस गांव में मीडिया पहुंचा और इस ख़बर को दिखाना शुरू किया तब कहीं जाकर प्रशासन की नींद टूटी और अब डीएम रवि कुमार एनजी ने जल निगम के अधिकारियों को गांव भेजा और जल्द ही गांव में आरओ सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है।

 

 

 

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