इस साल 10 फीसदी बढ़ेगी चीनी उत्पादन की क्षमता, ज्यादा उत्पादन बढ़ायेगी मुसीबत-

चीनी उत्पादन

ठंड के दिन करीब आने को है. साथ ही गन्ना पेराई सीजन की शुरूआत होने को है. आगामी गन्ना पेराई सीजन, 2018-19 में इस साल शुरु होनी वाली गन्ना पेराई में चीनी उत्पादन की क्षमता करीब 10 फीसदी तक बढ़ सकती है. यानि करीब 350-355 लाख टन चीनी इस साल भारत में उत्पादित हो सकती है. इस तरह बंपर चीनी उत्पादन और पाकिस्तान से आयातित चीनी के चलते गन्ना किसानों और चीनी इंडस्ट्री की मुसीबतें बढ़ सकती हैं. जिसके चलते आने वाला गन्ना पेराई सीजन दोनों के लिए सिर्द दर्द बन सकता है. क्योंकि आने वाले सीजन में चीनी की कीमतें भी गिरने के अनुमान अभी से लगाये जा रहे हैं. चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन नें भी इस साल 2018-19 के सीजन में होने वाली चीनी उत्पादन को लेकर अनुमान जताते हुए कहा है कि आने वाले साल में चीनी उत्पादन को लेकर नया रिकॉर्ड बन सकता है. साथ ही चीनी संगठन इस्मा ने बताया की ये उत्पादन पिछले वर्ष के उत्पादन से लगभग 10 गुना ज्यादा होगा.

जाहिर है, ज्यादा चीनी उत्पादन और गन्ने की बंपर पैदावार के चलते किसानों से लेकर चीनी मिलों के लिए मुसीबत बनने वाला है.

क्योंकि जहां किसानों को गन्ना बेचने और मिलों से अपने गन्ने की रकम निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं इस तरह की पैदावार से चीनी मिलों की पेराई अवधि बढ़ सकती है. पिछले साल का अभी तक 20 हजार करोड़ रुपए अभी भी किसानों के बाकी है. आज भले ही हमारे देश में चीनी के दाम 40 से 50 रुपए के बीच हो, लेकिन चीनी भंडारण से लगता है कि हमारे देश में चीनी की कोई कमी नही है.

पिछले साल के मुताबिक इस साल गन्ना बोवाई का रकबा भी हमारे देश में बढ़ा है. वहीं इस साल ज्यादा चीनी उत्पादन, चीनी बाजार रसातल की तरफ बढ़ सकता है. क्योंकि हमारे देश में चीनी निर्यात की संभावनाएं न के बराबर हैं.

इस तरह के उत्पादन से जहां चीनी मिलें अभी से परेशान हैं, वहीं किसान अभी से अपने गन्ने के भाव को लेकर सोच में पड़ गए हैं.

एक किसान के मुताबिक, “आज हमारे देश में किसान वर्ग का बड़ा बुरा हाल है. हमारे देश के किसानों के अभी भी चीनी मिलों ने 20 हजार करोड़ नहीं चुकाये हैं. अगर आने वाले सीजन में चीनी उत्पादन ज्यादा बढ़ता है तो ये किसानों के लिए निश्चित ही बुरा होगा. क्योंकि किसानों को इसका लाभ नही मिल पायेगा.”

वहीं गोरखपुर में रहने वाले किसान घनश्याम वर्मा की माने तो, “आने वाला गन्ना पेराई सीजन में चीनी उत्पादन ज्यादा होगा. ज्यादा उत्पादन की वजह से चीनी मिलें किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं करेंगी. जिससे वजह से मजबूर होकर गन्ना किसान अपने गन्ने को कोल्हू या छोटी जगहों पर कम कीमतों में बेच देगा. जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा.”

सरकार के दिए आदेशों के मुताबिक चीनी मिलों में गन्ना बेचने के बाद ही 14 दिन के अंदर भुगतान हो जाना चाहिए. लेकिन अभी भी पिछले साल के 20 हजार करोड़ बाकी हैं. जोकि सरकार के दिये निर्देशों को धराशाई कर रही है. वहीं हाल ही में सरकार ने चीनी मिलों को 8000 करोड़ रुपये का पैकेज मिलों को दिया था. लेकिन इसके बावजूद भी गन्ना किसानों के बकाये रुपये अभी नहीं मिल पाये हैं.

पिछले साल चीनी की ज्यादा उत्पादन की वजह से लगभग 8 रुपये तक की गिरावट चीनी के भाव में आई थी. वहीं चीनी मिलों की माने तो कम भाव की वजह से किसानों का रुपया अभी तक मिल नहीं पाया है. पिछले साल हमारी चीनी मिलों ने लगभग 230.5 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था, जोकि उससे पहले वाले साल का लगभग 67.88 टन मतलब की 41 फीसदी से अधिक था. जिसकी वजह से कभी 50 के पार पहुंची चीनी इस साल अभी तक 40 के आस पास घूम रही है. चीनी उत्पादन के चलते जहां चीनी की कीमतों में गिरावट आई थी, वहीं चीनी कंपनियों के शेयरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था.

इसलिए इस साल के गन्ना पेराई सीजन में चीनी उत्पादन जहां किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है, वहीं चीनी मिलों के लिए काल बन सकता है.

 

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