इस गांव ने कायम की मिलास , गांव के लोगो ने दिन-रात एक करके बचाई एक किसान कि जान

गांव , किसान , जान , गरीब किसान , मानवता

जिस देश में अपने ही अपनों से मुहं फेर लेते हैं उसी देश में एक गांव कि खबर सुनकर आपको भी मानवता का एक अलग चेहरा देखने को मिलेगा, महाराष्ट्र का एक गांव मानवता कि मिसाल बन गया. एक गरीब किसान को बचाने के लिए पूरे गांव के लोगो ने दिन-रात एक कर दी, गांव वालो के बलिदान के आगे 20 लाख का बिल भी छोटा पड़ गया. वेंटिलेटर पर आखिरी सांस ले रहे किसान के परिवार के साथ पूरा गांव एक जुट हो कर खड़ा रहा, जब तक किसान को होश नही आया तब तक पूरा गांव किसान के परिवार पास रहा, और किसान को सही सलमात दूबारा अपने गांव लेकर जाने का इंतजार करता रहा.

 

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गांव ने कायम की मिलास , गांव के लोगो ने दिन-रात एक करके बचाई एक किसान कि जान

बता दे कि अमरावती जिले के जस्सापुर गांव के किसान मोहन भडांगे अस्पताल में भर्ती थें, दरअसल दो महिने पहले मोहन बारिश में भिग गए थे,  जिसके बाद वे बिमार पड़ गए, मोहन गांव के अस्पताल में जांच के लिए गए, तो जांच में पता चला कि उन्हें स्वाइन फ्लू हैं. डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें पुणे के अस्पताल में रेफर कर दिया. मोहन कि आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी, कि वे पुणे जाकर अच्छें अस्पताल में अपना इलाज करवा सकें, जब ये बात उनके परिवार को पता लगी तो वे परेशान हो गए कि वे शहर के बड़े अस्पताल में वो मोहन का इलाज कैसे करवाएंगें, लेकिन जब यह बात गांववालों को पता चली तो सभी गांव वाले उनकी मदद के लिए एक साथ खड़े हो गए, मोहन की मदद के लिए गांववालों और रिश्तेदारों ने शुरू में करीब 6 लाख रुपये जुटा लिए और पुणे लेकर इलाज के लिए पहुंचे।

मोहन को पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती करवाया गया. और वहां उनका इलाज शुरु हुआ, डॉक्टरो ने इलाज के दौरान बताया कि उन्हें स्वाइन फ्लू और न्यूमोनिया दोनो हैं, उनकी हालत पहले से ज्यादा खराब होती जा रही थी जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर डाल दिया. साथ ही मोहन कि जांच के बाद डॉक्टर को पता चला की उनकी किडनी भी खराब हो गई हैं, डॉक्टर के हाथ खड़े हो गए और डॉक्टर ने कहा कि मोहन को बचा काफी मुश्किल है,

मोहन के परिवार की इस दुख की घड़ी में उनके गांव वाले उनके साथ खड़ें रहें, हर समय गांव के लोग अस्पताल में मौजूद रहते थें. गांव वाले मोहन के परिवार को विश्वास दिलाते रहतें कि मोहन एक दम ठिक हो जाएगा, गांव वालो को होसला देख डॉक्टरों ने भी जी जान लागा दी, और हर तरीके से मोहन के परिवार का साथ देने लागें, मोहन करीब 2 महीने तक आईसीसीयू में रहे, इस दौरान करीब 20 लाख रुपये का खर्च आया लेकिन गांववालों और रिश्तेदारों के कारण यह बिल आसानी से जमा हो गया, और मोहन के इलाज में कोई मुश्किल नही आई,

मोहन के इलाज के लिए 2 महीने तक गांव के लोग परिवार के साथ अस्पताल में आते-जाते रहे, इस दौरान गांव के कई लोग लगातार अस्पताल में साथ रहे, उनका पूरा दिन चाय और ब्रेड पर ही गुजर जाता लेकिन बस उम्मीद एक ही थी कि मोहन की जिंदगी बचाकर लौटेंगे, गांववालों के समर्पण को देखते हुए हॉस्पिटल ने भी इलाज में सहयोग किया,

आखिर कार गांव वालो कि हिम्मत रंग लाई और मोहन ठिक होकर सही सलाम अपने गांव लोट आए, जिसके बाद उनके भाई केशव भडांगे मे पूरे गांव का धन्यवाद किया, आज गांव वालो कि ही बदोलत मोहन एक दम ठिक ठाक हैं,, ऐसे गांव के लोगो को सलाम करता हमारा देश,

 

 

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