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History of 8th April- 1857 में मंगल पाण्डे को फांसी की सजा

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History of 18th April

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History of 8th April-

8 अप्रैल 1857 को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले सिपाही मंगल पाण्डे को अंग्रेजी शासन के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई थी. आपको बता दें कि मंगल पाण्डेय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वो ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही भी थे. जिनके नाम पर भारत सरकार ने साल 1984 में डाक टिकट जारी किया था.

आज ही के दिन साल 1929 में क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली असेंबली में बम फेंका था. हालांकि, इस बमकांड का उद्देश्य किसी को हानि पहुँचाना नहीं था. इसीलिए बम भी असेम्बली में ख़ाली स्थान पर ही फेंका गया था. फम फेंकने के बाद भी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त वहाँ से भागे नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी गिरफ्तारी खुद कराई थी. इस दौरान भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने वहां लोगों के बीच पर्चे भी बाटें थे. जिसमें लिखा था कि – बहरों को सुनाने के लिये विस्फोट के बहुत ऊँचे शब्द की आवश्यकता होती है. जिसके बाद अंग्रेजों ने भगत सिंह पर ‘लाहौर षड़यन्त्र’ केस के नाम से मुकदमा चलाया और 7 अक्टूबर, 1930 को राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को फाँसी की सज़ा सुनाई.

आज ही के दिन साल 1892 में भारत के मशहूर इतिहासकार हेमचंद्र रायचौधरी का जन्म पोनाबलिया में हुआ था.. जोकि अब बांग्लादेश में है। आपको बता दें कि, हेमचंद्र रायचौधरी को प्राचीन भारतीय इतिहास में साल 1921 में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने पी.एच.डी से सम्मानित किया था.

8 अप्रैल 1894 में आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का निधन हुआ था. बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय, बंगाल के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, और पत्रकार भी थे. भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना ने भारतीय गुलामी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय में क्रान्तिकारियों के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम किया था.

आज ही के दिन साल 1950 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करने और भविष्य में दोनों देशों के बीच युद्ध की संभावनाओं को ख़त्म करने के मकसद से समझौता किया था. नई दिल्ली में छह दिनों तक चली बातचीत के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने इस समझौते पर दस्तखत किए थे।

आज ही के दिन साल 1961 में एक ब्रिटिश जहा जदारा के फारस की खाड़ी में गिर गया था. जिसमें सवार करीब 240 लोगों की मौत खाड़ी में डूबने से हो गई थी।

 

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