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History of 10th August-1963 में फूलन देवी का जन्म हुआ

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History of 10th August

History of 10th August-1963 में फूलन देवी का जन्म हुआ

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History of 10th August-

आज ही के दिन साल 1822 में सीरिया में विनाशकारी भूकंप आया था, इस भूकंप में लगभग 20,000 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा इस भूकंप की वजह से लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए थे.

आज ही के दिन दुनिया भर का चहेता किरदार स्पाइडरमैन पहली बार अमेजिंग फैंटेसी कॉमिक बुक में नजर आया था. आपको बता दें की स्पाइडमैन का किरदार स्टेन ली ने बनाया था, जिसे मार्बल ने लांच किया था.

आज ही के दिन साल 1860 में पंडित विष्णु नारायण भातखंडे का जन्म हुआ था. आपको बता दें कि भातखंडे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विद्वान थे. इसके साथ ही वो शास्त्रीय संगीत के पुनर्जागरण के अग्रदूत हैं जिन्होंने शास्त्रिय संगीत के विकास के लिए भातखंडे संगीत-शास्त्र की रचना की इसके अलावा उन्होंने कई संस्थाएँ व शिक्षा केन्द्र स्थापित किए.

आज ही के दिन साल 1916 में भारत फिल्म अभिनेता प्रेम अदीब का जन्म हुआ था. आपको बता दें प्रेम अदीब का असली शिवप्रसाद था हालांकि बाद में इन्होंने अपना ना बदल लिया था. वहीं दूसरी तरफ इनकी फिल्म राम बाण, राम विवाह में प्रेम अदीब ने राम का किरदार निभाया था, जिसके चलते इन्हें प्रसिद्धी मिली थी. वहीं इनके साथ शोभना समर्थ सीता के किरदार में नजर आई थी.

आज ही के दिन साल 1963 में चंबल के बीहड़ो से सियासी गलियारों तक पहुंचने वाली फूलन देवी का जन्म हुआ था. आपको बता दें की फूलन देवी डकैत से सांसद बनी एक भारत की एक राजनेता थीं. फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव के पूर्वा मल्लाह के घर हुआ था. 11 साल की ही उम्र में फूलन देवी की शादी कर दी गई थी. हालांकि शादी के बाद ही फूलन देवी के पति ने उन्हें अपने घर से बेदखल कर दिया था.

1977 में आज ही के दिन मशहूर झण्डा गीत लिखने वाले कवि श्यामलाल गुप्त पार्षद ने दुनिया को अलविदा कहा था. आपको बता दें की श्यामलाल गुप्त ने ही विजयी विश्व तिरंगा प्यारा गीत लिखा था. इसके अलावा श्यामलाल गुप्त भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक सेनानी, पत्रकार, समाजसेवी व अध्यापक थे.

आज ही के दिन साल 1995 में हिंदी के प्रसिद्ध लेखक व व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने दुनिया को अलविदा कहा था. मध्य प्रदेश के जमानी, होशंगाबाद, में जन्मे हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने व्यंग्य की विधा को दर्जा दिलाया था. इसके साथ ही उनके व्यंगों ने मनोरंजन की परंपरा को अधर से उठाकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा था.

 

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