आहुजा का लंगर कई सालों से भर रहा है भुखों का पेट

आहुजा

आज हम बात कर रहें है। एक ऐसे इंसान की जो कई सालों से सड़क पर भूखा सोने वालो का पेट भर रहा है। आज के इस दौर में जहां इंसान सिर्फ अपने बारे में सोचता है। वहीं कुछ बड़ा दिल रखने वाले लोग भी जिंदा है। ऐसा ही एक बड़ा दिल चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा का भी है। जगदीश लाल को चंडीगढ़ के लोग बाबा के नाम से जानते है। और उनकी पत्नी को जय माता दी कहते है। आपको बता दें, कि ये बुजुर्ग और उसकी पत्नी पिछले कई सालों से हजारों लोगों का पेट भर रहे है। वे 15 से भी ज्यादा सालों से पीजीआई के बाहर दाल, रोटी, चावल और हलवा बांट रहे हैं। वो भी बिना किसी छुट्टी के। उनके इस लंगर से हर रोज कई भूखे सोने वालो का पेट भरता है। उनको जानने वाले कुछ लोग तो ये तक कहते है। कि उन्होने एक से डेढ़ हजार लोगों को गोद ले रखा है। साथ ही,  उनके इस नेक काम की वजह से लोग ये भी कहते है। कि जब तक आहूजा बाबा जिंदा है। तब तक पीजीआई अस्पताल के बाहर कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोयेगा।

आपको बता दें, कि साल 2001 के बाद से ही वे लगातार पीजीआई के बाहर लंगर लगा रहे हैं। औऱ हर रात करीब 500 से 600 लोगों का लंगर तैयार होता है। इतना ही नहीं, लंगर के दौरान आने वाले बच्चों को वे बिस्कुट और खिलौने भी बांटते हैं। पैसा ज्यादा होने पर तो आपने अक्सर लोगों को चैरिटी करते देखा होगा। लेकिन आहुजा उन बड़े दिल वालो में से एक है। जिन्होनें पैसे की कमी होने पर अपनी प्रोपटी तक बेच दी। लेकिन कभी किसी को भूखा नहीं सोने दिया।

जगदीश लाल  2001 में बीमार होने के कारण पीजीआई में एडमिट हुए थे। और बहुत मुश्किलों के बाद वो बच पाए थे। और इस घटना के बाद से ही उन्होनें पीजीआई के बाहर लंगर लगाना शुरू कर दिया। उनको देख कई लोगों ने पीजीआई अस्पताल के बाहर लंगर करना शुरू कर दिया। हालांकि, इससे उनके लंगर में लोगों की संख्या कम होने लगी थी। लेकिन आहुजा खुश थे। कि उनसे प्रेरित होकर लोग अच्छे काम की पहल करने लगे है।

जगदीश लाल के पेट में कैंसर है जिसके कारण वो ज्यादा दूर का सफर तय नहीं कर पाते है। लेकिन बावजुद अपनी परेशानियों के वे रोज लंगर कराते है। औऱ जरूरतमंदों का पेट भी भरते है। उनकी खास बात है कि उन्होने आज तक कभी लंगर चलाने के लिए किसी की मदद नहीं ली।

हालांकि, 2016 में तबियत खराब होने के कारण आहुजा ने लंगर गोद देने का ऐलान तक कर दिया था। जिसके बाद  लंगर को गोद लेने के लिए भाजपा प्रदेश के अध्यक्ष संजय टंडन सामने भी आए थे। लेकिन बाद में आहुजा ने अपना फैसला वापस लेकर लंगर खुद चलाने का निर्णय लिया।

और अब उनका कहना है। कि जब तक वे जिंदा हैं, तब तक लंगर चलता रहेगा। उनके लंगर का सिलसिला आज से 35 साल पहले उनके बेटे के जन्मदिन पर शुरू हुआ था। अपने बेटे के जन्मदिन पर उन्होंने पहली बार सेक्टर-26 की मंडी में लंगर लगाया था। और लंगर में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई थी। खाना कम पड़ने पर पास के ढाबे से रोटियां भी मंगाई गई थी। और उसके बाद से ही उन्होने इस मंडी में लंगर लगाना शुरू कर दिया। लेकिन जनवरी 2000 में जब उनके पेट का ऑपरेशन हुआ। तो उन्होने पीजीआई के बाहर लोगों की मदद करने का फैसला लिया। और जिसके बाद से ही आहुजा के लंगर का सिलसिला शुरू हो गया।

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