अब बेबीकॉर्न की खेती कर किसान ऐसे हो सकते हैं मालामाल

अब बेबीकॉर्न की खेती कर किसान ऐसे हो सकते हैं मालामाल

अब बेबीकॉर्न की खेती कर किसान ऐसे हो सकते हैं मालामाल  पंतनगर : किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब कम लागत और कम समय लगाकर बेबीकार्न की अच्छी खेती कर किसान काफ़ी अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। आपको बता दें कि पंतनगर कृषि महाविद्यालय के मक्का वैज्ञानिकों की ओर से ये पहल की है। दरअसल इन वैज्ञानिकों ने ही किसानों के लिए उत्तम किस्म का मक्का का बीज वीएलबीसी-1और एचएम-4 बताया है। जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी डिमांड है।

कृषि महाविद्यालय के मक्का वैज्ञानिक डॉ. अमित भटनागर ने बताया कि एक हेक्टेयर कृषि भूमि में बेबीकॉर्न पैदा करने के लिए लगभग 40-45 किग्रा. बीज की आवश्यकता होती है। जिससे लगभग 1.25 लाख पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं। यही नहीं बेबीकॉर्न की वीएलबीसी-1 एवं एचएम-4 किस्म सबसे उपयुक्त है। बुवाई के लिए लाइन से लाइन की दूरी 45-50 सेमी. और पौधे से पौधों की दूरी 15-20 सेमी. होनी चाहिए। पोषक तत्व प्रबंधन के लिए 180 किग्रा. नत्रजन, 60 किग्रा. फास्फोरस एवं 40 किग्रा. पोटेशियम प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। जिसमें नत्रजन की एक चौथाई मात्रा बुवाई के समय और शेष मात्रा को दो से तीन बार में चार से पांच पत्ती की अवस्था, घुटने की ऊंचाई की अवस्था और नर मंजरी निकलते समय देनी चाहिए। इससे 12-14 क्विंटल बेबीकॉर्न मिलता है। 70 रुपये प्रति किग्रा. की दर से इसे बेचने पर 84,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्राप्त होते हैं। इसमें लागत लगभग 30,000-35,000 रुपये आती है। बेबी कॉर्न से 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ मिलता है। बेबीकॉर्न की तुड़ाई के बाद पौधों से पशुओं के लिए हरा चारा भी प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार ये फसल किसानों को कम समय में अधिक लाभ देती है। इसकी खेती करने के बाद किसानों को बाकि फसलों की तुलना में ज़्यादा मुनाफा होता है।

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